क्रेडिट कार्ड पर ऑफर देकर लोगों के साथ धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के 5 आरोपी काबू

आरोपी दिल्ली एनसीआर में साइबर फ्रॉड की करीब 50 वारदातों को दे चुके हैं। अंजाम, आरोपियों के खाते में पिछले 1 साल में पाया गया करीब 65 लाख रुपए का लेनदेन, तिहाड़ और मण्डोली जेल से देते थे साइबर ठगी को अंजाम

फरीदाबाद: 22 दिसम्बर, पुलिस आयुक्त विकास अरोड़ा द्वारा साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए साइबर अपराधियों पर लगाम लगाने के विशेष दिशा निर्देश के तहत कार्य करते हुए फरीदाबाद के साइबर थाना की टीम ने बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए 5 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों का नाम विकास, रोहित, इमरान, मुजीब तथा अमानुल्लाह उर्फ गुड्डू है। आरोपी मुजीब यूपी के बदायूं तथा बाकी आरोपी दिल्ली में रह रहे थे। आरोपी विकास तथा इसका एक साथी इन वारदातों के मुख्य आरोपी हैं जो पुराने साथी भी है। आरोपी विकास व इमरान पहले से तिहाड़ तथा सुमित मंडोला जेल में बंद थे जिसमे से आरोपी विकास तथा इमरान को फरीदाबाद पुलिस द्वारा प्रोडक्शन वारंट पर लिया गया है। इसके अलावा इनके 4 अन्य साथियों की गिरफ्तारी अभी बकाया है। आरोपी जेल से ही साइबर ठगी की इन वारदातों को अंजाम देते थे। आरोपी रोहित तथा अमानुल्लाह जेल के बाहर से मोबाइल को गेंद की तरह जेल में फेंकते थे जहां से आरोपी इमरान उसे विकास तक पहुंचाता था और आरोपी विकास जेल से ही अपने साथियों के साथ मिलकर साइबर ठगी की वारदात करते थे। आरोपियों के खिलाफ फरीदाबाद के साइबर थाना में षड्यंत्र रचने तथा धोखाधड़ी की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज है जिसमें आरोपियों ने फरीदाबाद के रहने वाले यशपाल के क्रेडिट कार्ड से करीब 95 हजार रुपए की धोखाधड़ी की वारदात को अंजाम दिया था।

पुलिस आयुक्त विकास अरोड़ा के दिशा निर्देश तथा पुलिस उपायुक्त नीतीश अग्रवाल के मार्गदर्शन में तुरंत कारवाई करते हुए साइबर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर बसंत के नेतृत्व में एसआई बाबूराम, एएसआई धर्मेन्द्र, प्रमोद, गीता, हवलदार देवेंदर, सिपाही कृष्ण गोपाल, सुमित तथा सन्दीप की टीम गठित की गई जिन्होंने उक्त आरोपियों को तकनीकी व गुप्त सूत्रों की सहायता से गिरफ्तार कर पुलिस रिमांड पर लिया।

पुलिस उपायुक्त नीतीश अग्रवाल ने प्रेस वार्ता के दौरान जानकारी देते हुए बताया कि आरोपी बहुत ही शातिर किस्म के अपराधी हैं। आरोपी जस्ट डायल से इंडसइंड क्रेडिट कार्ड धारकों का डाटा खरदते थे। क्रेडिट कार्ड पर ट्रांजैक्शन करने से क्रेडिट कार्ड से पर कुछ रीवार्ड प्वाइंट्स मिलते हैं जिन्हें कैशबैक या कोई अन्य सामान खरीदने के लिए उपयोग में लिया जा सकता है। इसी का फायदा उठाकर आरोपी क्रेडिट कार्ड धारकों को फर्जी लिंक भेजते थे और उन्हें रीवार्ड प्वाइंट्स को कैश करवाने का लुभावना ऑफर देते थे।आरोपी विकास का एक साथी रोजाना 1 लाख लोगों को बल्क में एसएमएस भेजता था। आरोपी इंडसइंड बैंक के क्रेडिटकार्ड धारकों को अपना निशाना बनाते थे जिन्होंने इंडसइंड बैंक से मिलती जुलती वेबसाइट बनवा रखी थी जिसमे Indusind की जगह Induslnd लिखा होता था। साइबर अपराधों के बारे में जानकारी ना होने के कारण तथा लुभावने ऑफर के लालच में आकर बोले भले लोग इसमें फंस जाते थे। आरोपी क्रेडिट कार्ड धारक को रीवार्ड प्वाइंट रीडिम करवाने के नाम पर एक लिंक भेजते थे और उस लिंक पर क्लिक करते ही इंडसइंड बैंक से मिलती जुलती फर्जी वेबसाइट खुल जाती थी जिसमें कार्ड धारकों को अपनी क्रेडिट कार्ड की सारी जानकारी फिलअप करनी होती थी। जानकारी के अभाव में कार्डधारक अपने क्रेडिट कार्ड का नंबर, एक्सपायरी डेट, सीवीवी नंबर, ईमेल आईडी, इमेल का पासवर्ड सहित सारी जानकारी उस फर्जी वेबसाइट में भर देते थे। उस वेबसाइट से आरोपियों के पास क्रेडिट कार्ड की सारी डिटेल पहुंच जाती थी।

क्रेडिट कार्ड की डिटेल आरोपियों के पास पहुंचने के पश्चात अब क्रेडिट कार्ड से पैसा अपने खातों में भिजवाने का खेल शुरू होता था। इसके लिए आरोपी हाउसिंग डॉट कॉम वेबसाइट का उपयोग करते थे जिस पर आमजन अपना अपने मकान का रेंट भर सकते हैं। आरोपी इस वेबसाइट पर कार्ड धारक के नाम से अकाउंट बनाकर उसमें वॉलेट बनाते थे और उस वॉलेट में पैसा डालने के लिए क्रेडिट कार्ड का उपयोग किया जाता था जिसके लिए कार्ड धारक की ईमेल आईडी पर एक ओटीपी प्राप्त होता था। आरोपियों के पास कार्ड धारक की ईमेल का पासवर्ड पहले से होता है जो उन्हे फर्जी वेबसाइट के माध्यम से प्राप्त हुआ था। आरोपी उस ईमेल आईडी को खोलकर उसमें से ओटीपी प्ले लेते थे और ईमेल को डिलीट कर देते थे। ओटीपी डालते ही क्रेडिट कार्ड से पैसा वेबसाइट के वॉलेट में आ जाता था जिसके पश्चात उस वॉलेट से पैसे को आसानी से किसी भी बैंक अकाउंट में भेजा जा सकता है। आरोपी हाउसिंग डॉट कॉम वेबसाइट में अपना बैंक अकाउंट जोड़ देते थे और वॉलेट से पैसा सीधा आरोपियों के बैंक अकाउंट में आ जाता था।

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इस वारदात में आरोपी मुजीब इनको फर्जी आईडी पर सिम उपलब्ध करवाता था। आरोपी रोहित ने हाउसिंग डॉट कॉम पर वेबसाइट पर अपना अकाउंट जोड़ रखा था जिसमें इनको पैसे प्राप्त होते थे। आरोपी विकास तथा उसका एक साथी इसमें साइबर मुख्य साइबर क्रिमिनल है जो वर्ष 2017 से साथ मिलकर कई साइबर अपराधों को अंजाम दे चुके हैं। आरोपियों के कब्जे से 9100 रुपए वारदात में प्रयोग 2 मोबाइल फोन व सिम कार्ड बरामद किए गए हैं।

आरोपी विकास इन वारदातों का मुख्य आरोपी है जिसके खिलाफ दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में साइबर ठगी के 18 मुकदमे दर्ज हैं जिसमें 9 मुकदमे दिल्ली 7 गुड़गांव तथा 2 मुकदमे फरीदाबाद के शामिल है। आरोपी इमरान के खिलाफ भी हत्या का एक मुकदमा दिल्ली में 1 मुकदमा दर्ज है। आरोपी दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में 50 से अधिक वारदातों को अंजाम दे चुके हैं। पुलिस जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी रोहित के बैंक अकाउंट में पिछले 1 वर्ष में करीब 65 लाख रुपए का लेनदेन हुआ है। पूछताछ पूरी होने के पश्चात गिरफ्तार 4 आरोपियों को नीमका जेल भेजा जा चुका है। आरोपी सुमित को मंडोला जेल से प्रोडक्शन वारंट पर लेकर गिरफ्तार किया जाएगा। मुख्य आरोपी विकास को रिमांड पूरा होने पर कल जेल भेजा जाएगा। साईबर ठगी की वारदात में संलिप्त बाकी अन्य साथी आरोपियो को भी जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।

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