KhabarNcr

एचसीएमसीटी मणिपाल हॉस्पिटल दिल्ली में 54 वर्षीय माँ को हार्ट ट्रांसप्लांट से मिला नया जीवन

पंकज अरोड़ा की रिपोर्ट/फरीदाबाद: 02 जनवरी 2026: एचसीएमसीटी मणिपाल हॉस्पिटल, द्वारका, दिल्ली के डॉक्टरों ने हरियाणा की एक 54 वर्षीय महिला का हार्ट ट्रांसप्लांट कर उन्हें एक नई जिंदगी प्रदान की है। इस महिला के हृदय ने काम करना बंद कर दिया था। वो सालों से कार्डियेक डिस्फंक्शन के कारण जीवित रहने के लिए संघर्ष कर रही थीं। सर्वोत्तम मेडिकल थेरेपी और आधुनिक प्रक्रियाओं से भी उन्हें मदद नहीं मिल पा रही थी। फिर एक ब्रेन डेड डोनर के स्वस्थ हृदय ने उन्हें जीवन का दूसरा मौका प्रदान किया।

Oplus_131072

मरीज को हॉस्पिटल में गंभीर हालत में लाया गया था। उनका इजेक्शन फ्रैक्शन बहुत कम यानी 15 प्रतिशत रह गया था। उनके पूरे शरीर में सूजन थी और बहुत ज्यादा थकान बनी हुई थी। उन्हें साँस लेने में तकलीफ हो रही थी। वो चलने या बैठने में असमर्थ थीं। पिछले दिनों में कई बार हॉस्पिटल में भर्ती होने के बाद वो 10 दिनों से इंट्रा- एयोर्टिक बैलून पंप (आई.ए.पी.बी) सपोर्ट (जो हृदय को पंप करने में मदद करता है) पर थीं। पेसमेकर सपोर्ट के साथ कार्डियेक रिसिंक्रोनाईज़ेशन थेरेपी (सीआरटी-डी) के बाद भी उनकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई, जिसके बाद उनकी जान बचाने के लिए हार्ट ट्रांसप्लांट का ही विकल्प बचा रह गया था।

हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए उन्हें एक महीने तक इंतजार करना पड़ा। जब गुड़गाँव के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में कंपैटिबल डोनर हार्ट उपलब्ध हुआ, तब डॉ. युगल किशोर मिश्रा, चेयरमैन – मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियेक साईंसेज़ एवं चीफ़ कार्डियोवैस्कुलर सर्जन, द्वारका और उनकी टीम ने हार्ट ट्रांसप्लांटेशन सर्जरी की। डोनर हार्ट को सुरक्षित रूप से द्वारका पहुँचाने के लिए एक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। इस सर्जरी को पूरा होने में 3 घंटे 20 मिनट का समय लगा। नए हार्ट ने ट्रांसप्लांट होने के बाद जल्द ही काम करना शुरू कर दिया।

डॉ. युगल किशोर मिश्रा, चेयरमैन – मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियेक साईंसेज़ एवं चीफ़ कार्डियोवैस्कुलर सर्जन, दिल्ली, ने कहा, “हमारी यह उपलब्धि एक विस्तृत, आत्मनिर्भर हार्ट फेल्योर एवं ट्रांसप्लांट प्रोग्राम का निर्माण करने के लिए सालों के अथक परिश्रम का नतीजा है। हम हार्ट फेल्योर के अलग-अलग चरणों में मरीजों का इलाज व सर्जरी कर चुके हैं। हम सुनिश्चित करते हैं कि उन्हें सही समय पर सही उपचार मिल सके। हार्ट ट्रांसप्लांट से मरीज को न केवल जीवन का एक और मौका मिला है, बल्कि उन्हें और उनके परिवार को आशा व बेहतर जीवन भी प्राप्त हुए हैं। मरीज के शरीर ने नए हार्ट के लिए अच्छी प्रतिक्रिया दी और वो 15 दिनों में ही अच्छी रिकवरी करने लगीं। कई महिलाओं में कार्डियेक समस्याएं बहुत तेजी से बढ़ती हैं, इसलिए उन्हें तुरंत पहचानना और इलाज करना बहुत जरूरी होता है। हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए आमतौर से लंबा इंतजार करना पड़ता है, लेकिन इस महिला को एक महीने के अंदर ही डोनर मिल गया, जिससे उनकी जान बच सकी।”

Oplus_131072

एचसीएमसीटी मणिपाल हॉस्पिटल, दिल्ली की हॉस्पिटल डायरेक्टर, विज़ी वर्गीज़ ने कहा, “हार्ट ट्रांसप्लांट कार्डियेक सर्जरी की सबसे जटिल प्रक्रियाओं में से एक है। जब मरीज बहुत ज्यादा बीमार और गंभीर हालत में हो, तब यह सर्जरी करना और अधिक मुश्किल हो जाता है। इस महिला के इलाज में टीम ने बेहतरीन तालमेल, मजबूत टीमवर्क, तुरंत फैसले लेने की क्षमता और बिल्कुल सटीक सर्जरी का प्रदर्शन किया। इस हार्ट ट्रांसप्लांट की सफलता हमारे संस्थान की एक बड़ी उपलब्धि है। इससे विश्वस्तर की आधुनिक कार्डियक केयर प्रदान करने की हमारी प्रतिबद्धता प्रदर्शित होती है।”

इस उपलब्धि ने दिल्ली-एनसीआर के अग्रणी ट्रांसप्लांट केंद्रों में से एक के रूप में एचसीएमसीटी मणिपाल हॉस्पिटल की स्थिति को मजबूत किया है। इसने मरीजों की केयर, सर्जिकल सटीकता, और मल्टीडिसिप्लिनरी तालमेल के मानक स्थापित कर दिए हैं। एडवांस्ड कार्डियक केयर में सेंटर ऑफ एक्सिलेंस के रूप में एचसीएमसीटी मणिपाल हॉस्पिटल, दिल्ली मिनिमली इन्वेज़िव वॉल्व सर्जरी, सीआरटी-डी इंप्लांटेशन, एलवीएडी सपोर्ट, टीएवीआई, टीएवीआर और हार्ट ट्रांसप्लांट जैसी सभी इंटरवेंशनल प्रक्रियाएं की जाती हैं। यहाँ पर मरीजों को उनकी क्लिनिकल जरूरतों के अनुरूप समय पर और विस्तृत केयर प्राप्त होती है।

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.