पंकज अरोड़ा की रिपोर्ट/फरीदाबाद: आर्य समाज सेक्टर-7 के तत्वावधान में ‘शहीद दिवस’ मनाते हुए देश के अमर शहीदों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। साप्ताहिक यज्ञ की पूर्णाहुति के बाद आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों ने अपनी प्रस्तुतियों से देशभक्ति का जज्बा जगा दिया।

आर्य समाज के बच्चों ने एक विशेष लघु नाटिका के माध्यम से शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु पर अंग्रेजों द्वारा किए गए अत्याचारों और उनके संघर्ष को प्रदर्शित किया। नाटक में दिखाया गया कि कैसे 1928 में लाला लाजपत राय की मृत्यु का बदला लेने के लिए इन वीरों ने ब्रिटिश अधिकारी जॉन सॉन्डर्स की हत्या के आरोप में लाहौर षड्यंत्र केस के तहत हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूम लिया।

कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण वह था जब भगत सिंह और उनकी माता के बीच जेल में हुए अंतिम संवाद को मंच पर दर्शाया गया। इस मार्मिक दृश्य को देखकर उपस्थित लोगों की आंखें नम हो गईं। पूरा वातावरण ‘सरफरोशी की तमन्ना’ और देशभक्ति के गीतों से गुंजायमान रहा। देशभक्ति के गीतों के बीच जब तीनों क्रांतिकारी फांसी के फंदे की ओर बढ़े, तो पूरा परिसर ‘भारत माता की जय’ के उद्घोष से गूंज उठा। सीमित संसाधनों के बावजूद बच्चों के प्रभावी अभिनय और देशभक्ति के गीतों ने पूरे माहौल को राष्ट्रप्रेम के रंग में सराबोर कर दिया।

शशांक कौशिक के कुशल निर्देशन में तैयार इस नाटक में शौर्य कौशिक ने भगत सिंह, श्रेय कौशिक ने राजगुरु और समर्थ कौशिक ने सुखदेव की भूमिका को बखूबी निभाया। वहीं, श्वेता कौशिक ने भगत सिंह की माँ के रूप में दर्शकों की आँखें नम कर दीं। साकेत कौशिक ने जेलर और जज के पात्रों को पूरी कुशलता के साथ मंच पर उतारा। कार्यक्रम के दौरान संजय आर्य ने ‘कर चले हम फिदा जानो तन साथियों’ जैसे देशभक्ति गीत की प्रस्तुति दी, जिससे पूरा माहौल राष्ट्रप्रेम के रंग में रंग गया

आर्य समाज के मंत्री सतीश कौशिक ने बताया कि संस्था समय-समय पर ऐसी देशभक्तिपूर्ण नाटिकाओं का मंचन करती रहती है ताकि युवा पीढ़ी अपनी जड़ों और इतिहास से जुड़ी रहे। उन्होंने बताया कि इससे पूर्व भी स्वामी दयानंद सरस्वती व स्वामी विरजानंद के संवाद और श्रीकृष्ण-कर्ण संवाद जैसी लघु नाटिकाओं का सफल मंचन किया जा चुका है।

आर्य समाज के प्रधान निष्ठाकर आर्य समस्त सदस्यों तथा बच्चों के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास और क्रांतिकारियों के बलिदान की प्रेरणा मिलती है।
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इस गौरवमयी आयोजन में वसु मित्र सत्यार्थी, होती लाल आर्य, नंदकिशोर महता, रामबीर नाहर, रजनी बत्रा, केसरी राजन, सतीश आर्य, मनीष आर्य, जगदीश विरमानी, सराह सिंह, संघमित्रा कौशिक, रजनी भाटिया सहित विभिन्न आर्य समाजों के प्रतिनिधियों व सदस्य भारी संख्या में उपस्थित रहे।


