गीता का मूल मंत्र: जो हुआ अच्छा हुआ, जो हो रहा है अच्छा हो रहा है, जो होगा अच्छा ही होगा: मास्टर जी
पंकज अरोड़ा की रिपोर्ट/फरीदाबाद: जन्म के समय चिप अंदर गई थी, चिप जिसको हम भाग्य, डेस्टिनी, लक, नसीब कहते हैंI ये नसीब, मौत तक जो लिखा है, उसी तरह चलता रहेगा और इस खेल के अंदर तुझे रिलैक्स में रहना है, शांत रहना है कि “जो हुआ अच्छा हुआ, जो हो रहा है अच्छा हो रहा है, जो होगा अच्छा ही होगा”I ये ‘गीता’ का सार हम सुनते आए हैं; गुरु ग्रंथ साहिब का सार ‘हुकम के अंदर सब हुकम के बाहर ना कोए’, ‘हुकम रजाई चलना’ कि रजा में रहना है, तो सब लिखा हुआ है । “कर्म सदड़ा खेत” कोई दिमाग किसी का तेज नहीं होता, अल्फ्रेड आइंस्टीन, जिसने दुनिया की महान खोजें कीं, उसका दिमाग कई देशों में भेजा गया था कि देखें कुछ स्पेशल है? पर कुछ स्पेशल नहीं निकला I फिर ये भाग्य, नसीब, डेस्टिनी, लक क्या है और ये कैसे बना ?

श्री कृष्ण ने अर्जुन से कहा कि इस शरीर में आने से पहले भी तू थाI तू कहाँ था तुझको मालूम नहीं है अर्जुन ! लेकिन मुझको सब मालूम हैI ये क्या मैं-मेरा, मैं-मेरा करता है? कभी ऐसा नहीं था कि ये नहीं थे, कभी ऐसा नहीं कि ये नहीं होंगेI तू मेरा प्यारा शिष्य है, क्योंकि तू मुझे प्यार करता हैI इसलिए मैं तुझे कहता हूँ जाग, अपना कर्म कर, और परमधाम को प्राप्त होI परमधाम यानी जो ऊर्जा शरीर में अंदर गई है, शरीर से जब बाहर निकलेगी और अगर वो ऊर्जा इस संसार में किसी से अटैच नहीं है, तो अपने घर जाएगी और स्रोत में मिल जाएगीI जैसे बुद्ध, महावीर, जीसस, गुरु नानक देव, राम परमहंस, साईं बाबा मिल गए Iऔर अगर अटैच है तो मरा रह इस संसार में और सोचता रह कि हाय, मैं ये हो जाता !

भाग्य कैसे बनता है ? इच्छा में आसक्ति से कि हाय मैं ये बन जाता। हम में से कितनों ने सोचा होगा कि यार मैं कहीं आर्मी में ऑफिसर बन जाता या मैं डॉक्टर बन जाताI कोई होगा कि मैं चार्टर्ड अकाउंटेंट बन जाता; सोचा होगा ना कि मैं ये बन जाता ? और हम उसी सोच में दुखी होते जा रहे हैं I तो एक चिप, जो जन्म से मौत तक फिल्म स्क्रीन के ऊपर चल रही है, ये प्रारब्ध कर्म है, उसको गीता में संचित कर्म कहा है; गुरु ग्रंथ साहिब में कहा है “कर्म सदड़ा खेत”I वो खाली चिप जो लगी है, तो इसमें जो इस जन्म में इच्छा में आसक्ति होगी वो रिकॉर्ड होगा । जैसे आज हम रोते रहें, दुखी रहें किसी के लिए तो वो अंदर रिकॉर्ड हो जाएगा कि ठीक है, अगले जन्म में तेरे को आर्मी का अफसर बना देंगे, बना देंगे डॉक्टरI इस जन्म में तेरे खेल में नहीं लिखा हुआ, तू कितना मर्जी सिर फोड़ ले ! तो भाग्य कैसे बनता है वो मैं आपको बता रहा हूँ । फिर जब तू दुखी होता है कि हाय ये क्या हो गया, परेशान है तो पाँच मिनट जैसे ही क्रॉस करते हैं या तू अगर दुखी रह गया तो ये सीन रिशूट होगा, रिशूट ! ये भी उस खाली चिप में कहीं रिकॉर्ड हो गया । तो भाग्य कैसे बनता है ? इच्छा में आसक्ति और जब तू दुखी होता है वो पाँच मिनट क्रॉस करते ही वो भी तेरा बदकर्म हो गया, वो भी जुड़ गया, वो सीन रिशूट होगा; तो दोनों का जोड़ है भाग्य, नसीब, किस्मत ! अब ये समझ में आ गया तो खेल समझ में आ गया । स्क्रिप्ट अंदर डला हुआ है । एक स्टार जैसे शाहरुख खान और करिश्मा कैमरे के आगे शूटिंग करते हैं कोई पति-पत्नी का रोल अदा करते हैं पर वो पति-पत्नी थोड़ी है। कहीं कोई बेटे का रोल कर रहा है कि अमिताभ बच्चन का बेटा रितिक रोशन बन गया या शाहरुख खान; पर क्या वो बेटा है ? तो कहा इस जन्म से पहले करोड़ों शरीरों से तू निकलकर आया हैI सिर्फ इस शरीर की आयु ही तेरी आयु नहीं है, तेरी आयु करोड़ों साल हैI अब इस शरीर में तू आया, तू अपना रोल अदा कर, तूने ही तो यह फिल्म साइन की थी ना।

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