*लगातार खांसी और सांस लेने में दिक्कत को परिवार सामान्य संक्रमण समझता रहा, लेकिन जांच में सामने आया खतरनाक एयरवे इमरजेंसी का मामला
पंकज अरोड़ा की रिपोर्ट/फरीदाबाद: 27 मई 2026, दो साल के एक बच्चे की लगातार खांसी आखिरकार एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी में बदल गई। बच्चे के फेफड़े में टीवी रिमोट का छोटा बल्बनुमा हिस्सा एक हफ्ते तक फंसा रहा, जिसे अमृता अस्पताल, फरीदाबाद के डॉक्टरों ने बेहद जटिल प्रक्रिया के जरिए सुरक्षित बाहर निकाला।

दो वर्षीय बच्चे के फेफड़े से निकाला गया टीवी रिमोट का बल्बनुमा हिस्सा।
बच्चे को 11 मई को अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में लाया गया था। उसे लगातार खांसी, सांस लेने में दिक्कत, तेज आवाज के साथ सांस आना और बीच-बीच में बुखार की शिकायत थी। परिवार ने शुरुआत में इसे सामान्य संक्रमण समझकर स्थानीय बाल रोग विशेषज्ञ को दिखाया था, क्योंकि खांसी ठीक नहीं हो रही थी।
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जांच के दौरान माता-पिता को याद आया कि करीब एक सप्ताह पहले बच्चा टीवी रिमोट के छोटे बल्ब जैसे हिस्से के साथ खेल रहा था और संभव है कि वह गलती से उसके गले में चला गया हो। इसके बाद बाल रोग विशेषज्ञ को विदेशी वस्तु सांस की नली में फंसने का संदेह हुआ और बच्चे को तुरंत अमृता अस्पताल रेफर किया गया, अस्पताल में जांच के दौरान पता चला कि वस्तु बच्चे के दाहिने फेफड़े की निचली ब्रोंकस यानी सांस की पतली नली में गहराई तक फंसी हुई थी। डॉक्टरों के अनुसार मामला बेहद जोखिमभरा था क्योंकि उस वस्तु में धातु के तार और नाजुक कांच का हिस्सा मौजूद था। लंबे समय तक फंसे रहने के कारण वहां सूजन और ग्रैनुलेशन टिश्यू भी बन चुका था, जिससे उसे निकालना और कठिन हो गया था, स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पीडियाट्रिक पल्मोनोलॉजी, एडल्ट पल्मोनोलॉजी, पीडियाट्रिक एनेस्थीसिया और ईएनटी विभाग की टीमों ने मिलकर तुरंत ऑपरेशन थिएटर में इमरजेंसी ब्रोंकोस्कोपी की तैयारी की।

अमृता अस्पताल, फरीदाबाद में दो वर्षीय बच्चे के फेफड़े में फंसे टीवी रिमोट के बल्बनुमा हिस्से को सफलतापूर्वक निकालने वाली विशेषज्ञ टीम — डॉ. मनिंदर ढालीवाल, डॉ. सौरभ पाहुजा और डॉ. रिधिमा भाटिया।
इस जटिल प्रक्रिया में डॉ. मनिंदर ढालीवाल, डॉ. सौरभ पाहुजा और डॉ. रिधिमा भाटिया समेत कई विशेषज्ञ शामिल रहे। एडवांस ब्रोंकोस्कोपी तकनीक की मदद से डॉक्टरों ने बेहद सावधानी के साथ विदेशी वस्तु को बाहर निकाला, जिससे बच्चे की सांस तुरंत सामान्य हो गई। उपचार के बाद बच्चे को अगले ही दिन अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
डॉक्टरों ने कहा कि बच्चों में ऐसी घटनाएं कुछ ही मिनटों में जानलेवा बन सकती हैं। यदि किसी बच्चे को अचानक खांसी, सांस लेने में तकलीफ या तेज आवाज के साथ सांस आने जैसी समस्या हो, खासकर किसी चीज के गले में फंसने के बाद, तो इसे बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, इलाज करने वाली टीम ने कहा, “बच्चों में एयरवे इमरजेंसी के मामलों में समय पर पहचान और अलग-अलग विशेषज्ञ टीमों का तालमेल ही जीवन बचाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाता है।
