थैलेसीमिया ग्रस्त बच्चों ने विशिष्ट अंदाज़ में मनाया डॉक्टर दिवस

फरीदाबाद: 01 जुलाई, यानी ‘डॉक्टर दिवस’ पर ग्लोबली इंटीग्रेटिड फॉउंडेशन फॉर थैलेसीमिया (गिफ्ट) द्वारा समर्थित थैलेसीमिया ग्रस्त बच्चों ने डॉ विकास दुआ, डायरेक्टर, हीमेटोलॉजी, ऑन्कोलॉजी एवं बोन मैरो ट्रांसप्लांट, फोर्टिस मैमोरियल रिसर्च इंस्टिट्यूट गुरूग्राम व वरिष्ठ कंसल्टेंट, डॉ मानसी सचदेव का मन अपनी मासूमियत भरे अंदाज़ से मोह लिया।

उल्लेखनीय है कि ये दोंनो डॉक्टर हर महीने के पहले बृहस्पतिवार को विशेष तौर पर इन थैलेसीमिक बच्चों के निशुल्क हैल्थ चैक-अप के लिये गुरूग्राम से फरीदाबाद आते हैं। सयोंगवंश इस महीने के पहले बृहस्पतिवार को ही डॉक्टर दिवस पड़ रहा था, तो गिफ्ट ने इन डॉक्टरों द्वारा मरीज़ों को चैक करने वाले कमरे को रंगबिरंगे गुब्बारों से सजा कर उनका स्वागत किया। चैकअप करवाने आये कुछ थैलेसीमिक बच्चों ने डॉक्टरों को फूल, ग्रीटिंग कार्ड्स, चॉकलेट्स व अन्य उपहार सप्रेम भेंट कर उनका अभिनंदन किया। नौनिहालों का अपने प्रति इस प्यार से दोनों डॉक्टर भाव विभोर हो गये।

इस मौके पर गिफ्ट की ओर से दोनों डॉक्टरों के करकमलों से केक कटवाकर उपस्थित लोगों का मुँह मीठा किया गया। गिफ्ट के प्रधान मदन चावला द्वारा दोनों डॉक्टरों को स्मृति चिन्ह देकर भी सम्मानित किया गया।

डॉक्टर बन कर आयी नन्ही खुशी
नौ वर्ष की चुलबुली थैलेसीमिक बच्ची खुशी ने अपने प्रिय डॉक्टरों का आभार एक अनूठे अंदाज़ से प्रकट किया। एक डॉक्टर के जैसे ही सफेद कोट वाला लिबास पहने और गले में खिलौने वाला स्टेथोस्कोप लगाये खुशी ने कमरे में प्रवेश करते ही दोनों डॉक्टरों से कहा कि आज के लिये “मैं डॉक्टर हूँ और आप मेरे मरीज़।” बच्ची की इस मासूमियत पर फिदा होकर कुछ क्षणों के लिये दोनों डॉक्टर जैसे स्वयं भी बच्चे बन गये और उत्साहित होकर उसके साथ खेलने लगे। नन्हीं खुशी ने दोनों डॉक्टरों के लिये अपनी प्रेस्क्रिप्शन में लिखा कि वो अपने प्रिय डॉक्टरों के लिये हमेशा एक मुस्कुराहट भरी ज़िन्दगी की कामना व प्रार्थना करती है।

डॉक्टरों ने कहा, यह प्यार अनमोल है।
डॉ विकास व डॉ मानसी ने इस अवसर पर कहा कि वो इंसानियत के नाते ज़रूरतमन्द थैलेसीमिया व अन्य रक्त्त विकार रोगियों की यथासंभव मदद के लिये सदैव तत्पर रहते हैं। इससे ना केवल मरीज़ों को फायदा होता है बल्कि उन्हें स्वयं भी एक आत्मिक संतुष्टि की अनुभूति होती है। खुशी जैसे अनेक रोगियों से जो प्यार उन्हें मिलता है वो अनमोल होता है, डॉक्टरों ने अपनी भावनाओं को संक्षिप्त शब्दों में बयाँ करते हुवे कहा।

भगवान का दूसरा रूप हैं डॉक्टर्स।
थैलेसीमिया ग्रस्त बच्चों को इन डॉक्टरों के द्वारा दी जाने वाली निस्वार्थ सेवाओं की महानता को शब्दों में वर्णन करना असम्भव ही होगा, मदन चावला ने कहा। डॉक्टर दिवस के अवसर पर आभार रूपी हमारे इस तुच्छ इज़हार को इन डॉक्टरों ने स्नेहपूर्वक स्वीकार करके वास्तव में हमारा ही मान बढ़ाकर हमें कृतार्थ किया है। डॉक्टर दिवस पर हम परमात्मा से यही दुआ करते हैं कि वो डॉ विकास व डॉ मानसी जैसे ज़मीन पर रहने वाले भगवान रूपी डॉक्टरों को सदा खुश रखें।

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