*हेड एंड नेक सर्जरी और इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी के समन्वित उपचार से एक वर्ष बाद सामान्य हुआ एयरवे*
पंकज अरोड़ा की रिपोर्ट/दिल्ली-एनसीआर, 27 जुलाई 2026:* इंदौर में काम के दौरान हुए एक गंभीर हादसे में एक युवक की श्वासनली बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। उसकी प्राकृतिक सांस की नली लगभग 99 प्रतिशत तक बंद हो चुकी थी। जान बचाने के लिए डॉक्टरों को उसकी गर्दन में छेद कर सांस लेने की ट्यूब डालनी पड़ी। वह न तो सामान्य रूप से सांस ले पा रहा था और न ही ठीक से बोल सकता था।
![]()
*अमृता अस्पताल, फरीदाबाद में की गई जटिल श्वासनली पुनर्निर्माण सर्जरी और उसके बाद लगभग एक वर्ष तक चले ब्रोंकोस्कोपिक उपचार के बाद अब मरीज अपनी प्राकृतिक श्वासनली से सामान्य रूप से सांस ले रहा है। उसकी आवाज भी वापस आ गई है और वह ट्रेकियोस्टॉमी ट्यूब पर निर्भरता से मुक्त होकर सामान्य जीवन की ओर लौट चुका है।*
*इंदौर निवासी सुनील कुमार एक मशीन पर काम कर रहे थे, तभी कपड़े का एक टुकड़ा मशीन में फंस गया। अचानक लगे तेज झटके से उनकी गर्दन पर गंभीर चोट आई और श्वासनली टूटकर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। चोट के बाद श्वासनली का रास्ता धीरे-धीरे सिकुड़ता गया और स्वरयंत्र के ठीक नीचे सांस लेने के लिए बेहद कम जगह बची थी।*

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शुरुआती उपचार के दौरान डॉक्टरों ने आपातकालीन ट्रेकियोस्टॉमी की। इसमें गर्दन में छेद कर रुकावट के नीचे सांस लेने की ट्यूब डाली गई। इस प्रक्रिया ने सुनील की जान तो बचा ली, लेकिन वह पूरी तरह गर्दन में लगी ट्यूब पर निर्भर हो गए। मुंह और नाक से सामान्य रूप से सांस लेना तथा बोलना लगभग असंभव हो गया था।
बाद में उन्हें विशेष श्वासनली सर्जरी के लिए इंदौर से अमृता अस्पताल, फरीदाबाद रेफर किया गया। यहां सीटी स्कैन और ब्रोंकोस्कोपी जांच में सामने आया कि स्वरयंत्र के प्रवेश द्वार के ठीक नीचे श्वासनली अत्यधिक संकरी हो चुकी थी। दुर्घटना के कारण आवाज से संबंधित एक नस भी क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिससे इलाज और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया।
*अमृता अस्पताल, फरीदाबाद के हेड एंड नेक सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. शिखर साहनी* ने बताया, “श्वासनली के बुरी तरह क्षतिग्रस्त हिस्से को हटाकर दोनों स्वस्थ सिरों को दोबारा जोड़ना ही स्थायी उपचार था। यह सामान्य एयरवे सर्जरी नहीं थी। मरीज की प्राकृतिक सांस की नली 99 प्रतिशत तक बंद थी और चोट स्वरयंत्र के बेहद करीब थी। हमारे शरीर में केवल एक ही श्वासनली होती है, इसलिए गलती की कोई गुंजाइश नहीं थी।”

उन्होंने बताया कि क्षतिग्रस्त हिस्से को अत्यंत सावधानी से हटाकर श्वासनली के स्वस्थ सिरों का पुनर्निर्माण किया गया। इस दौरान सांस लेने और आवाज से जुड़ी महत्वपूर्ण संरचनाओं को सुरक्षित रखना सबसे बड़ी चुनौती थी।
हालांकि, सर्जरी के साथ ही सुनील का उपचार समाप्त नहीं हुआ। ऑपरेशन के बाद श्वासनली के जुड़ने और घाव भरने की प्रक्रिया के दौरान वहां दोबारा निशानयुक्त ऊतक बनने लगे। इससे पुनर्निर्मित हिस्से में फिर संकुचन पैदा होने का खतरा था। ऐसे में इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी टीम ने ब्रोंकोस्कोपी के माध्यम से श्वासनली के अंदरूनी हिस्से की लगातार निगरानी की और जरूरत पड़ने पर संकरे हिस्से को फैलाया।
*अमृता अस्पताल, फरीदाबाद के इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. सौरभ पाहुजा* ने कहा, “श्वासनली की सर्जरी के बाद भी मरीज का लंबे समय तक फॉलोअप जरूरी होता है। घाव भरने के दौरान बनने वाला निशानयुक्त ऊतक सांस की नली को दोबारा संकरा कर सकता है। ब्रोंकोस्कोपी की मदद से पुनर्निर्मित हिस्से को सीधे देखा जा सकता है और संकुचन गंभीर होने से पहले उसका उपचार किया जा सकता है।”
उन्होंने बताया कि सुनील के मामले में बार-बार की गई ब्रोंकोस्कोपी जांच और एयरवे डाइलेशन यानी श्वासनली को फैलाने की प्रक्रिया ने अंतिम परिणाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इलाज के लगभग एक वर्ष बाद की गई नवीनतम ब्रोंकोस्कोपी में श्वासनली पूरी तरह ठीक और लगभग सामान्य पाई गई। सुनील अब अपनी प्राकृतिक श्वासनली से सांस ले रहे हैं, सामान्य रूप से बोल पा रहे हैं और उन्हें गर्दन में लगी ट्रेकियोस्टॉमी ट्यूब की आवश्यकता नहीं है।
डॉक्टरों के अनुसार, दुर्घटना के कारण श्वासनली को होने वाली गंभीर चोटें बहुत दुर्लभ होती हैं, लेकिन सांस का रास्ता बंद होने पर कुछ ही मिनटों में जानलेवा साबित हो सकती हैं। आपातकालीन ट्रेकियोस्टॉमी मरीज की जान बचा सकती है, लेकिन प्राकृतिक श्वासनली को दोबारा कार्यशील बनाने के लिए अत्यधिक विशेषज्ञता वाली सर्जरी, इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी और लंबे समय तक निगरानी की आवश्यकता पड़ सकती है।
कुछ सेकंड में हुआ हादसा सुनील की सांस और आवाज दोनों छीन सकता था। हेड एंड नेक सर्जरी तथा इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी विभाग के समन्वित प्रयासों ने उन्हें गर्दन की ट्यूब पर निर्भर जीवन से निकालकर दोबारा सामान्य रूप से सांस लेने और बोलने की क्षमता दी।
