अमृता अस्पताल, फरीदाबाद में सफल सर्जरी; प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के तहत मिला निःशुल्क उन्नत उपचार
पंकज अरोड़ा की रिपोर्ट/फरीदाबाद: 23 जून 2026, कई महीनों से पेट दर्द, भूख न लगना और थोड़ी मात्रा में भोजन करने पर भी पेट भरा हुआ महसूस होने जैसी समस्याओं से जूझ रही 30 वर्षीय शशि को तब राहत मिली जब अमृता अस्पताल, फरीदाबाद के चिकित्सकों ने उसके पेट से बालों का एक विशाल गुच्छा (ट्राइकोबेज़ोआर) सफलतापूर्वक निकाल दिया। यह दुर्लभ स्थिति वर्षों तक बाल निगलने की आदत के कारण विकसित हुई थी, जो एक मानसिक स्वास्थ्य विकार से जुड़ी पाई गई।
![]()
फरवरी से लगातार पेट दर्द, मतली, भूख में कमी और कमजोरी की शिकायतों के बावजूद शशि की बीमारी का कारण कई स्वास्थ्य केंद्रों में स्पष्ट नहीं हो पाया था। अमृता अस्पताल में विस्तृत जांच के दौरान चिकित्सकों ने पाया कि उसके पेट में बड़ी मात्रा में बाल जमा होकर एक ठोस गांठ का रूप ले चुके थे।
जांच में यह भी सामने आया कि मरीज ट्राइकोटिलोमेनिया नामक मानसिक विकार से पीड़ित थी, जिसमें व्यक्ति को बार-बार अपने बाल नोचने की अनियंत्रित इच्छा होती है। कुछ मामलों में मरीज उन बालों को निगल भी लेते हैं, जिसे ट्राइकोफेजिया कहा जाता है। चूंकि बाल शरीर में पचते नहीं हैं, इसलिए वे धीरे-धीरे पेट में जमा होकर ट्राइकोबेज़ोआर का रूप ले लेते हैं।

*मरीज का उपचार अमृता अस्पताल के गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जरी विभाग के डॉ. सलीम नाइक, डॉ. पुनीत धर और डॉ. जया अग्रवाल की बहु-विषयक टीम द्वारा किया गया।* चिकित्सकों ने एक्सप्लोरेटरी लैप्रोटॉमी के माध्यम से बालों के इस विशाल गुच्छे को सफलतापूर्वक निकाल दिया। यदि समय रहते उपचार नहीं किया जाता तो यह स्थिति आंतों में रुकावट, गंभीर कुपोषण, संक्रमण, पेट या आंत में छेद जैसी जानलेवा जटिलताओं का कारण बन सकती थी।
इस मामले की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह रही कि मरीज का पूरा उपचार प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) / आयुष्मान भारत के अंतर्गत किया गया। इस योजना के माध्यम से मरीज को बिना किसी आर्थिक बोझ के उच्च स्तरीय विशेषज्ञ चिकित्सा एवं जटिल सर्जिकल उपचार उपलब्ध कराया गया। यह मामला दर्शाता है कि किस प्रकार सरकारी स्वास्थ्य योजनाएं आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तक उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित कर रही हैं। सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति लगातार बेहतर होती गई। उसे शीघ्र चलने-फिरने के लिए प्रोत्साहित किया गया, धीरे-धीरे सामान्य आहार शुरू कराया गया और चौथे पोस्ट-ऑपरेटिव दिन स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
विशेषज्ञों के अनुसार यह मामला मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक बीमारियों के बीच गहरे संबंध को रेखांकित करता है। चिकित्सकों ने मरीज को भविष्य में बीमारी की पुनरावृत्ति रोकने के लिए नियमित मनोचिकित्सकीय परामर्श और व्यवहारिक चिकित्सा जारी रखने की सलाह दी है।
यह सफल उपचार समय पर निदान, बहु-विषयक चिकित्सा दृष्टिकोण, उन्नत सर्जिकल विशेषज्ञता तथा आयुष्मान भारत जैसी जनकल्याणकारी स्वास्थ्य योजनाओं के महत्व को उजागर करता है।
