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श्रमिकों के न्यूनतम पारिश्रमिक में बढ़ोतरी पर उद्योग जगत की चिंता, भारत अशोक अरोड़ा ने उठाए सवाल

पंकज अरोड़ा की रिपोर्ट/फरीदाबाद: 13 अप्रैल, हरियाणा सरकार द्वारा श्रमिकों के न्यूनतम पारिश्रमिक में की गई बढ़ोतरी को लेकर उद्योग जगत में चिंता बढ़ गई है।समाज सेवी भारत अशोक अरोड़ा ने इस निर्णय को उद्यमियों के हितों पर “कुठाराघात” करार दिया है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने आम बजट से पहले जिला स्तर पर उद्यमियों के प्रतिनिधिमंडलों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया था, लेकिन श्रमिकों के पारिश्रमिक में वृद्धि जैसे महत्वपूर्ण फैसले से पूर्व उद्योगपतियों से कोई चर्चा नहीं की गई। अरोड़ा के अनुसार, यह कदम श्रमिकों के हित में जरूर है, लेकिन इससे उद्योग क्षेत्र पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।

उन्होंने मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों का हवाला देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे तनाव और युद्ध जैसे हालातों के कारण कच्चे माल की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है। पिछले 40 दिनों से अधिक समय से जारी वैश्विक अस्थिरता का असर उद्योगों पर साफ दिखाई दे रहा है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ गई है।

अरोड़ा ने बताया कि वर्तमान में लोहा, इस्पात, स्क्रैप और प्लास्टिक जैसी प्रमुख औद्योगिक सामग्री के दाम पहले ही बढ़े हुए हैं। ऐसे में श्रमिकों के वेतन में 35 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी ने उद्योग जगत के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।

हरियाणा सरकार द्वारा 9 अप्रैल को जारी अधिसूचना के अनुसार नई न्यूनतम वेतन दरें इस प्रकार निर्धारित की गई हैं:

• अकुशल (Unskilled) श्रमिक: ₹15,220 प्रति माह

• अर्ध-कुशल (Semi-Skilled) श्रमिक: ₹16,780 प्रति माह

• कुशल (Skilled) श्रमिक: ₹18,500 प्रति माह

• उच्च कुशल (Highly Skilled) श्रमिक: ₹19,425 प्रति माह

अरोड़ा ने कहा कि यदि सरकार इस निर्णय से पहले उद्योगपतियों के साथ संवाद करती, तो श्रमिकों और छोटे उद्योगों—दोनों के हितों का संतुलन बेहतर तरीके से साधा जा सकता था। उन्होंने मांग की कि भविष्य में ऐसे निर्णय लेने से पहले सभी पक्षों से परामर्श किया जाना चाहिए, ताकि आर्थिक गतिविधियों पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े।।

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