डीएवी शताब्दी महाविद्यालय में छात्रों के लिए प्रेरणादायक व्याख्यान का आयोजन

निस्वार्थ सेवा भाव और कठिन परिश्रम से संभव है सामान्य जीवन को प्रेरणादायिनी जीवन में परिवर्तित करना:

फरीदाबाद: 04 फरवरी, डीएवी शताब्दी महाविद्यालय फरीदाबाद निरंतर कई वर्षों से छात्रों के सर्वांगीण विकास हेतु विद्यालय प्रांगण में शैक्षिक गतिविधियों के साथ-साथ आध्यात्मिक और व्यवहारिक क्रियाकलापों का आयोजन करता आ रहा है। इसी कड़ी में वैश्विक महामारी से प्रताड़ित समाज के सभी वर्गों की जीवन शैली को जोकि वर्तमान में असामान्य होती जा रही है, एक सफल और प्रेरणादायक जीवन शैली में परिवर्तित करने के उद्देश्य से डीएवी शताब्दी महाविद्यालय फरीदाबाद के द्वारा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर एक आध्यात्मिक और प्रेरणा प्रद व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस वेबीनार में वेदांता विजन की संस्थापक जया राव जो कि एक प्रख्यात अंतरराष्ट्रीय वक्ता है और 30 वर्षों से वेदांता के अध्ययन और शोध से जुड़ी हुई है, मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित रही। राव ने न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी अनगिनत बहुराष्ट्रीय कंपनियों में वेदांत विषय पर व्याख्यान दिया है। इस वेबीनार में महाविद्यालय की प्राचार्या डॉक्टर सविता भगत ने मुख्य वक्ता का हार्दिक अभिनंदन करते हुए व्याख्यान के विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि भागवत गीता वेदांत का ही अंश है और जीवन में सुख और दुख दोनों ही अस्थाई है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि कोरोनावायरस के कारण सामान्य दिनचर्या में हुए परिवर्तनों से हताश और निराश छात्रों को एक सफल और प्रसन्न दिनचर्या में पुनः वापस लाने के उद्देश्य से इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। डॉक्टर सविता भगत ने छात्रों को अपनी संकीर्ण मानसिकता को त्याग कर अपने विचारों को निस्वार्थ भावना से जोड़ने के लिए कहा जिससे वे अपने जीवन को स्वयं के सुख से ऊपर उठाकर दूसरों के सुख के लिए भी समर्पित कर सकें।
मुख्य वक्ता ने वेबीनार में उपस्थित सभी शिक्षक शिक्षिकाओं और छात्र छात्राओं को राष्ट्र की भावी धरोहर मानते हुए उन्हें प्रेरणादायक जीवन शैली की अनगिनत खूबियों से परिचित कराया। श्रीमती जया ने अपने वक्तव्य में प्रसन्नता और आनंद से संपूर्ण जीवन शैली के लिए निस्वार्थ सेवा भावना, त्याग और समर्पण की भावना, ईर्ष्या का परित्याग, कठिन परिश्रम, सकारात्मक सोच, अंतर्मन की समझ, अपनी क्षमताओं पर विश्वास, आत्मविश्वास और प्रकृति से प्रेम जैसे गुणों को अपने अंदर विकसित करने के लिए कहा। उन्होंने एपीजे अब्दुल कलाम , गांधीजी, अकबर, प्रहलाद, सर डॉन ब्रैडमैन जैसे अपने अपने क्षेत्र के विशिष्ट व्यक्तित्व की प्रेरणादाई कहानियों के माध्यम से छात्र छात्राओं को अपनी शारीरिक और मानसिक ऊर्जा का सही दिशा में निवेश करने की सलाह दी। इस वेबीनार में हरियाणा एजुकेशन काउंसिल के चेयरमैन डॉ बीके कुठियाला ने भी डीएवी शताब्दी महाविद्यालय की प्रशंसा करते हुए इस प्रकार के व्याख्यान के आयोजन के लिए सभी कार्यकारी सदस्यों को बधाई दी। उन्होंने मुख्य वक्ता के संदेश को आज के युवा छात्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए छात्रों को आजकल के प्रतिस्पर्धात्मक समय में अपनी ऊर्जा का संचार सही दिशा में करने के लिए कहा और वेदांत के सिद्धांतों को इस कार्य को करने के लिए सबसे बड़ा मार्गदर्शक बताया। इस वेबीनार में डीएवी मैनेजमेंट कमेटी दिल्ली से डॉक्टर डी वी सेठी भी उपस्थित रहे। व्याख्यान के अंत में वेदांता ट्रस्ट से उपस्थित सदस्या वैशाली मकवाना ने सभी के साथ भगवत गीता सप्ताहिक वेबीनारो और यूट्यूब पर जया के व्याख्यानों को निरंतर श्रवण कर पाने की सूचना से अवगत कराया। इस अवसर पर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर 300 से भी अधिक लोगों ने उपस्थिति दर्ज की और फेसबुक पर भी सजीव प्रसारण में अनेक लोगों ने भाग लिया। इस वेबीनार में बीबीए विभाग की अध्यक्षा अंकिता महिंद्रा ने मध्यस्थता की और कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद प्रस्ताव ज्ञापित किया। कार्यक्रम के सफलतापूर्वक आयोजन में कार्यकारी सचिव डीएवी शताब्दी महाविद्यालय के खेल विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर नरेंद्र कुमार का और तकनीकी पक्ष में दिनेश जी का विशेष योगदान रहा।

इस व्याख्यान ने सभी छात्र छात्राओं को भारतीय दर्शन के अत्यंत प्रभावशाली वक्ता से रूबरू कराया और वेदांत जिसे विश्व की आत्मप्रबंधन की सबसे बड़ी और सबसे प्रथम पाठशाला कहा जाता है और वेदांत जिसे जीवन का विज्ञान समझा गया है जो प्रत्येक व्यक्ति में प्रसन्नता और आत्मविश्वास, संतोष और परित्याग की भावना भर देने की क्षमता रखता है, ऐसे विचारों से डीएवी शताब्दी महाविद्यालय के छात्र छात्राओं को लाभान्वित किया गया। निश्चित रूप से यह व्याख्यान आज की युवा पीढ़ी की भ्रमित जीवन शैली को सद मार्ग पर पुनः संचालित करने में महत्वपूर्ण सिद्ध होगी।

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