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‘जश्न-ए-फरीदाबाद-5’ में गूंजे मानवता और रिश्तों के स्वर; विख्यात रचनाकारों ने बांधा समां

पंकज अरोड़ा की रिपोर्ट/फरीदाबाद: फरीदाबाद साहित्यिक एवं सांस्कृतिक केंद्र के तत्वावधान में आयोजित ‘जश्न-ए-फरीदाबाद-5’ के अंतर्गत अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का भव्य आयोजन किया गया। इसमें देश के नामचीन कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम में हरियाणा सरकार के राज्य मंत्री राजेश नागर ने मुख्य अतिथि और पूर्व शिक्षा मंत्री सीमा त्रिखा ने विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत की। अध्यक्ष नवीन सूद, सांस्कृतिक सचिव विनोद मलिक, महासचिव मनोहर लाल नंदवानी, और कार्यकारिणी सदस्य अश्विनी सेठी सहित अन्य पदाधिकारियों ने अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया तथि अतिथियों को पट्टिका पहनाकर और एफएलसीसी का स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका अभिनंदन किया गया।

इस अवसर पर उपस्थित सभी कवियों और शायरों को भी पटका पहनाकर और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि राजेश नागर ने अपने संबोधन में एफएलसीसी की पूरी टीम को इस भव्य और सफल आयोजन के लिए बधाई दी। उन्होंने संस्था के प्रयासों की सराहना करते हुए आगामी कार्यक्रमों के लिए अपनी शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

कार्यक्रम की में सुरेंद्र सिंह ‘सजर’ ने आधुनिक जीवन की विडंबनाओं पर प्रहार करते हुए कहा, सुरेंद्र सिंह ‘शजर’ के इस शेर ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया

तबीयत ही हमारी कुछ अजब थी

उसे ठुकरा दिया जिस की तलब थी

इसके साथ ही, दुनिया की परवाह न करने के जज्बे को उन्होंने अगले मिसरे में बखूबी पिरोया

मुखालिफ़ हो तो हो दुनिया हमारी

हमारे साथ वो पहले भी कब थी

वहीं, सुप्रसिद्ध शायर अज़हर इकबाल ने पिता के साथ रिश्तों की गहराई और पछतावे को मार्मिक शब्दों में पिरोया। उन्होंने कहा कि पिता के जीवित रहते हम अक्सर उनसे संवाद नहीं कर पाते।

अब उनकी आवाज़ गूंजती है हर एक क़दम पर

पिता जीवित थे तो उनसे संवाद कर ना पाए

रूहानियत पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि

‘रब केवल सर झुकाने से नहीं, बल्कि दिल के झुकने से मिलता है’

प्रसिद्ध शायरा शबीना अदीब ने अपने चिर-परिचित अंदाज़ में शालीनता और संस्कार पर चोट करते हुए पढ़ा:

“जो खानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना,

तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई-नई है।”

साथ ही उन्होंने परोपकार का संदेश देते हुए अपनी जरूरतों को कम कर दूसरों के आंसू पोंछने का आह्वान करते हुए कहा

अपना गम इस तरह थोड़ा कम कीजिए

दूसरों के लिए आंख नम कीजिए

कुछ गरीबों के दिन भी संवर जाएंगे

आप अपनी जरूरत को कम कीजिए

सुप्रसिद्ध हास्य कवि डॉ. पॉपुलर मेरठी ने अपनी चिर-परिचित अंदाज़ और तीखे कटाक्षों से भरी रचनाओं के माध्यम से व्यवस्था और मानवीय स्वभाव पर गहरा प्रहार करते हुए पढा़

ये है सच के नेक नियत कभी थी ना है ना होगी

मेरे काम में शराफत कभी थी ना है ना होगी

मुझे नाज अपने फन पर के मे जेब काटता हूॅ

मुझे मांगने की आदत कभी थी ना है ना होगी

हास्य और व्यंग्य के साथ-साथ गंभीर विमर्श के इस संगम में कुंवर रंजीत चौहान और गजेंद्र प्रियांशु ने भी अपनी प्रभावी प्रस्तुतियां दीं। फरीदाबाद की स्थानीय प्रतिभाओं में एस.एन. भारद्वाज ‘अश्क’, सुनीता रैना, अभिषेक देसवाल और साहिल कौशिक ने बेहतरीन काव्य पाठ कर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।

कार्यक्रम का सफल संचालन और निर्देशन मशहूर कवि दिनेश रघुवंशी ने किया। उन्होंने अपनी धारदार रचनाओं और कुशल संचालन से साहित्य प्रेमियों के लिए इस शाम को यादगार बना दिया।

फरीदाबाद के वरिष्ठ पत्रकार और ‘शेरे हरियाणा’ के मुख्य संपादक अमरनाथ बागी को उनकी दशकों लंबी निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता के लिए फरीदाबाद साहित्यिक एवं सांस्कृतिक केंद्र द्वारा ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड’ से नवाजा गया। सम्मान ग्रहण करने के पश्चात अमरनाथ बागी ने संस्थान का आभार व्यक्त किया और कहा कि पत्रकारिता केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी है।

इस कार्यक्रम से पूर्व साहित्यिक मंच ‘चौपाल’ के में ‘किस्सा कहानी’ विषय पर एक विशेष परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस गोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. बीना शर्मा, सिन्नी वाली और रिंकल शर्मा ने शिरकत की। विशेष अतिथि के रूप में हरियाणा की पूर्व शिक्षा मंत्री सीमा त्रिखा उपस्थित रही। कार्यक्रम के दौरान कहानी की परिभाषा, उसकी संरचना और समाज में इसकी प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। . बीना शर्मा ने कहानी कहने की कला पर विचार रखते हुए कहा कि कहानी में सरलता और प्रवाह का होना अनिवार्य है। प्रसिद्ध लेखिका सिन्नी वाली ने अपने संबोधन में साहित्य की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा, “साहित्य समाज का दर्पण है रिंकल शर्मा ने कहानी की व्यापकता को संगीतमय अंदाज़ में बयां किया। उन्होंने कहा कि कहानी को एक मशहूर गाने के बोल—’जिंदगी और कुछ भी नहीं, तेरी मेरी कहानी है’—में बेहद भावपूर्ण शब्दों में परिभाषित किया गया है। उन्होंने तर्क दिया कि जीवन का हर छोटा-बड़ा हिस्सा अपने आप में एक मुकम्मल कहानी है।

तीन दिवसीय ‘जश्न-ए-फरीदाबाद-5’ कार्यक्रम का समापन अत्यंत उत्साहपूर्ण रहा, जिसमें कला और संस्कृति के प्रति एफएलसीसी के समर्पण की सभी ने प्रशंसा की

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