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‘जश्न-ए-फरीदाबाद-5’ में सदाबहार नगमों की बही संगीतमय धारा

पंकज अरोड़ा की रिपोर्ट/फरीदाबाद: फरीदाबाद साहित्यिक एवं सांस्कृतिक केंद्र द्वारा आयोजित ‘जश्न-ए-फरीदाबाद-5’ में सदाबहार नगमों की ऐसी संगीतमय धारा बही कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर का संस्था के पदाधिकारियों ने भव्य स्वागत किया।

प्रधान नवीन सूद, सांस्कृतिक सचिव विनोद मलिक, महामंत्री मनोहर लाल नंदवानी, कोषाध्यक्ष वसु मित्र सत्यार्थी और कार्यकारिणी सदस्य अश्विनी सेठी तथा वी.के. अग्रवाल ने मुख्य अतिथि को पट्टिका पहनाकर और स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका अभिनंदन किया।

इस अवसर पर कृष्ण पाल गुर्जर ने एफएलसीसी के कला, साहित्य, संगीत और सामाजिक योगदान की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा, यह हमारे लिए गर्व की बात है कि एफएलसीसी फरीदाबाद की सांस्कृतिक विरासत को संजोने और संवारने में निरंतर प्रयासरत है। फरीदाबाद की जनता को इन बेहतरीन कार्यक्रमों में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होना चाहिए। उन्होंने ‘जश्न-ए-फरीदाबाद-5’ के सफल आयोजन के लिए पूरी टीम को बधाई और भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

सदाबहार नगमे’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस शाम ने तब यादगार रूप ले लिया जब ‘किशोर अलंकरण सम्मान’ से सम्मानित और किशोर कुमार की आवाज के जादूगर राजेश अय्यर एवं इंडियन आइडल फेम फरीदाबाद की अपनी बेटी अंकिता मिश्रा ने अपनी सुरीली प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

राजेश अय्यर ने किशोर दा के सदाबहार गीतों जैसे ‘मैं हूं झुम झुम झुमरू’, ‘मेरे सपनों की रानी’, और ‘ओ मेरे दिल के चैन’ से कार्यक्रम की शुरुआत की। उनकी जादुई आवाज ने ‘तेरे बिन जिंदगी से कोई शिकवा’, ‘जिंदगी का सफर है ये कैसा सफर’ और ‘ये जवानी है दीवानी’ जैसे गानों पर श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। वहीं, फरीदाबाद की शान अंकिता मिश्रा ने अपनी मधुर आवाज में ‘ये समा है ये प्यार का’, ‘हमें तुमसे प्यार कितना’ और ‘तुझसे नाराज नहीं जिंदगी’ जैसे गीतों के माध्यम से माहौल को बेहद भावुक और सुरीला बना दिया। दोनों कलाकारों ने किशोर कुमार को अपनी सुरीली श्रद्धांजलि अर्पित की, जिसे उपस्थित जनसमूह ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ सराहा। कार्यक्रम के दौरान प्रदीप पल्लवी ने न केवल मंच का संचालन किया, बल्कि अपनी चिर-परिचित शैली में समसामयिक विषयों पर ऐसे कटाक्ष किए कि पूरा सभागार ठहाकों से गूंज उठा।

चौपाल” कार्यक्रम के दौरान “फरीदाबाद का रिश्ता बन्नु तक” विषय पर एक विशेष संवाद सत्र का आयोजन किया गया जिसमें शामिल वक्ताओं ने अपने संस्मरण साझा किए। मुख्य वक्ता के रूप में देश के प्रसिद्ध लेखक एवं इतिहासकार विवेक शुक्ला उपस्थित रहे। उनके साथ सरदार मोहन सिंह भाटिया, गुलशन भाटिया तथा विनोद मलिक ने भी अपने विचार साझा किए। विवेक शुक्ला ने फरीदाबाद के निर्माण में बन्नु (अब पाकिस्तान में) से आए शरणार्थियों के संघर्ष और योगदान पर प्रकाश डाला उन्होने बताया कि बन्नुवाल समुदाय के लोगों को यहाँ बसाया गया और उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत से फरीदाबाद को एक औद्योगिक शहर के रूप में स्थापित किया। सरदार मोहन सिंह भाटिया ने विभाजन के उन कठिन दिनों को याद करते हुए कहा कि फरीदाबाद की मिट्टी में बन्नु की संस्कृति और रवायतें आज भी रची-बसी हैं। गुलशन भाटिया और विनोद मलिक ने शहर के सामाजिक और आर्थिक ताने-बाने को मजबूत करने में समुदाय की भूमिका पर जोर दिया।

डॉ. अंजू मुंजाल के कुशल निर्देशन में आयोजित प्रथम अर्धशास्त्रीय नृत्य प्रतियोगिता कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शास्त्रीय और अर्धशास्त्रीय नृत्य के प्रति नई पीढ़ी की रुचि जगाना रहा। प्रतियोगिता में नन्हे कलाकारों ने भावपूर्ण प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति की सुंदर झलक पेश की। प्रतियोगिता में निर्णायक की भूमिका साक्षी गौड़ और अलाईवा ने निभाई। उन्होंने बारीकी से प्रदर्शन का आकलन करने के बाद प्रथम अमायरा लूथरा, द्वितीय अहाना सैनी, और तृतीय भानवी नागपा विजेताओं और सांत्वना पुरूस्कार जागृति तथा शनाया भाटिया को प्रदान किये गये। सभी विजयी प्रतिभागियों को एफएलसीसी द्वारा स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया तथा प्रत्येक प्रतिभागी को भागीदारी प्रमाण पत्र प्रदान किए गये।

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