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    Home » कामधेनु आरोग्य वैलनेस संस्थान में महामंत्र साधना और निशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया

    कामधेनु आरोग्य वैलनेस संस्थान में महामंत्र साधना और निशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया

    Khabarin NCRBy Khabarin NCR24/05/202646 Views
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    कामधेनु आरोग्य वैलनेस संस्थान में महामंत्र साधना और निशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन

    तावडू:24 मई, कामधेनु आरोग्य वैलनेस संस्थान में आज महामंत्र साधना, निःशुल्क चिकित्सा शिविर तथा मासिक हवन का सफल आयोजन किया गया । आयोजन में क्षेत्र के अनेक महानुभावों और नागरिकों ने भाग लेकर शिविर का लाभ उठाया । 

    इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि प्रो. प्रेमव्रत जी, आईआईटी के बोर्ड ऑफ गवर्नरस् के अध्यक्ष (आई एस एम ) धनबाद और प्रो-चैन्स्लर-नॉर्थ कप यूनिवर्सिटी, गुरुग्राम, आशीर्वचन एवं मार्गदर्शन परम पूज्य मंत्र महर्षि डॉक्टर श्री योगभूषण जी गुरुदेव, संस्थापक – धर्मयोग फाउंडेशन और सोहम मूवमेंट और श्री प्रताप जी, माननीय प्रांत संघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ तथा हरियाणा राज्य और देश के अनेक महानुभव उपस्थित रहे ।

    हवन से कार्यक्रम का शुभारम्भ किया । हवन का संचालन आदर्श गर्ग ने किया । हवन प्रथा के अनुसार मई मास में जिन लोगों के जन्मदिवस, विवाह की वर्षगांठ एवं पुण्यतिथि थी, उनके नाम से अग्नि देव को आहुति अर्पित की गई तथा समस्त मानव जाति के हित में सुख-शांति के लिए प्रार्थना की गई।

    मञ्च का संचालन संस्थान के महामन्त्री प्रियंक गुप्ता ने किया । प्रियंक जी योगभूषण जी के बार मे बताया कि वह एक प्रसिद्ध मंत्र साधक एवं आध्यात्मिक मार्गदर्शक होने के साथ साथ ज्योतिष शास्त्र और मंत्र विज्ञान के मर्मज्ञ अध्येता है, जिन्हे युग सन्यासी, धर्मयोगी, सिद्धि सम्राट, ध्यान प्रज्ञ , निमित्त ज्ञानी, मंत्र महर्षि आदि अनेकों अलंकर्णों से विभाषित किया जा चुका है । कोरोना के कठिन समय मे जिनके द्वारा हजारों रोगियों को मंत्र चिकित्सा के माध्यम से स्वास्थ्य लाभ मिला था। जिनकी आध्यात्मिक मंत्र चिकित्सा से अनेकों श्रद्धालु कैंसर, डाइबीटीस, ह्रदय रोग जैसी अनेकों गंभीर बीमारियों से छुटकारा पा चुके हैं। जिनके धार्मिक – वैज्ञानिक अमृत प्रवचन जन-गण-मन मे एक दिव्य ऊर्जा का संचार कर शांति और सुकून प्रदान करते हैं, जिनकी ओजपूर्ण वाणी जन-जन को भारतीय संस्कृति और धर्म से जोड़ती है।

    स्वागत कार्यक्रम में योगभूषण जी का स्वागत उषा गर्ग, दीपक गर्ग और डॉ एस पी गुप्ता ने, श्री प्रताप जी का सुनील जिंदल, ब्रह्मदत और महावीर भारद्वाज ने, प्रो. प्रेमव्रत का श्रीमती सविता उपाध्याय, पायल गुप्ता और पवन गुप्ता जी ने और श्री मदन लाल जिंदल जी का आदर्श गुप्ता और श्रीमती शशि गुप्ता जी ने ने तुलसी का पौधा, कामधेनु स्मृति चिन्ह, कामधेनु आँवलाप्राश एवं पटका भेंट करके किया ।

    डॉ. एस पी गुप्ता ने सभी गणमान्य अतिथियों का विस्तृत परिचय दिया। उन्होंने गौरक्षा और उनके संवर्धन पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने वर्तमान मे चल रहे पुरुषोत्तम मास के महत्व पर भी प्रकाश डाला और सेवा की महिमा भी बताई।

    प्रो. प्रेमव्रत ने बताया कि कामधेनु गोधाम मे यह उनका प्रथम आगमन है । उन्होंने संस्थान की गतिविधियों का अवलोकन किया और अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने प्राचीन आरोग्य तंत्र – आयुर्वेद चिकित्सा पद्दती पर अपने विचार व्यक्त किए और बताया कि पिछले कुछ वर्षों मे आयुर्वेद का अच्छा प्रचार-प्रसार हो रहा है। उन्होंने आयुर्वेद के प्रचार प्रसार के लिए डॉ एस पी गुप्ता जी को भी साधुवाद दिया । उन्होंने बताया कि गुप्ता जी की सादगी और सरलता ने उन्हे बहुत प्रभावित किया है जबकि वह एक शान-शौकत का जीवन बिता सकते थे। प्रेमव्रत जी ने बताया कि पिछले करीब 60 वर्षों से वह शिक्षा के क्षेत्र मे अपना योगदान दे रहे है और आज 82 वर्ष की उम्र मे भी पढ़ाते है। उन्होंने बताया कि आई आई टी और इंजीनियर के अलावा और भी अच्छे व्यवसाय है । हमें अपनी मानसिकता मे सकरात्मकता लाने का प्रयास करना चाहिए । प्रतिभाशाली बच्चों को सम्मानित करने का संस्थान का प्रयास सराहनीय है । उन्होंने बताया कि हमें मानवीय मूल्यों को कभी नहीं भूलना चाहिए । उनके द्वारा लिखित पुस्तक “माय सिस्टर 60 वर्ष एज आईं आई टी एन ” श्री ब्रह्मदत्त और डॉ एस पी गुप्ता द्वारा कामधेनु संस्थान की पुस्तकालय को भेंट की। उन्होंने बताया कि परीक्षा मे अच्छे अंक लाना अच्छा है लेकिन उसके लिए तनाव कभी नहीं लेना चाहिए ।

    कामधेनु आरोग्य वैलनेस संस्थान ने प्रतिभाशाली छात्रों को “उत्कृष्ट उपलब्धि पुरस्कार” सम्मानित किया। छात्रों के नाम है “मुस्कान गुप्ता, ओमव गुप्ता, हर्षिता बंसल, लक्ष्य बंसल, अर्शिया गर्ग, पार्थ गर्ग, दीपांशी जो व्यक्तिगत रूप से अपने माता पिता सहित उपस्थित रहे। छात्रों को गो-गुल्लक और संस्थान मे निर्मित पदार्थों की भी भेंट दी गई।

    प्रताप जी ने बताया कि कामधेनु आरोग्य वैलनेस संस्थान जीवन जीने और स्वस्थ रहने का समाज मे प्रचार प्रसार कर रहा है जो एक उत्कृष्ट सेवा कार्य है।

    अपने आशीर्वचन मे परम पूज्य मंत्र महर्षि डॉक्टर श्री योगभूषण जी ने बताया कि मंत्र चिकित्सा मे सबसे बड़ी जरूरत होती है मन की। कोई भी बीमारी पहले मन मे प्रकट होती है और बाद मे शरीर मे दिखाई पड़ती है। हमारा आभामंडल हमारे बारे मे बहुत सी बाते बताता है। हमारे जीवन मे बहुत सी तरंगे होती है लेकिन हमे उसका आभास नहीं होता है। जीवन मे सबसे बड़ी पीड़ा है मानसिक तनाव, चिंता, निराशा, हताशा।

    जो मन की रक्षा करता है उसे मन कहते है । ऐसा कोई भी अक्षर नहीं है जिसे मंत्र के रूप मे प्रयोग नहीं किया जा सकता। मनस्य त्राणमिति अथार्थ जो मन की रक्षा करे वह मंत्र है । मन और ह्रदय की लड़ाई के कारण तनाव पैदा होता है। दायाँ शरीर पुरुष का है और बायाँ शरीर स्त्री होता है । हमारे दिमाग मे कई तरंगे होती है जिसे अल्फ़ा, डेल्टा, बेटा, देटा,गामा मे विभाजित कर सकते है। योगभूषण जी ने कई स्वरों की भी बात की और बताया कि हमारा कौन सा स्वर वर्तमान मे कार्यशील है जानना चाहिए । उन्होंने खुशी के रसायनों – हार्मोन्स की भी बात की जिसमे दोपामाइंन, ऑकसीटोशीन, ऐरडोफिन और सेरोटोनिन शामिल है। हार्मोन्स को मंत्र चिकित्सा से संतुलित किया जा सकता है।

    योगभूषण ने मंत्र साधन मे माल के महत्व पर प्रकाश डाला और बताया माला व्यक्तिगत होनी चाहिए। माला रुद्राक्ष, कमलगट्टे, स्फटिक मणि, चंदन और तुलसी की लकड़ी की हो सकती है। कांच की या अन्य लकड़ी की माल नहीं होनी चाहिए । स्वास्थ्य के लिए रुद्राक्ष की माला, धन प्राप्ति के लिए कमलगट्टे की, मानसिक शांति के लिए स्फटिक मणि की माला प्रयोग की जा सकती है। असली रुद्राक्ष की माला से जप करना सर्वोत्तम है।

    मंत्र साधना मे दिशा, आसन, उंगलियों का भी बहुत महत्व है। पारिवारिक शांति के लिए रिंग की उंगली, वित्तीय उन्नति के लिए माध्यमिक उंगली और मोक्ष के लिए कनिष्ठिका उंगली पर मंत्र जप करना चाहिए। संकल्प से ही सिद्धि होती है। बिना संकल्प के मंत्र साधना नहीं करनी चाहिए । कोई भी मंत्र मन से नहीं जपना चाहिए। गुरु द्वारा प्रदत्त मंत्र ही जपना चाहिए। आधे अधूरे मन से किसी कार्य की सिद्धि नहीं होती । किसी और के आसन पर बैठकर मंत्र जप नहीं करनी चाहिए। मंत्र जप करते समय पाँच-महाभूतों – पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश की उपस्थिति आवश्यक है। उन्होंने बताया कि मंत्र सिद्धि की परीक्षा कैसे करें। उन्होंने समस्या समाधान मे मंत्र के प्रभाव पर भी प्रकाश डाला । उन्होंने सात शक्ति चक्र और संगीत के सात स्वर पर भी प्रकाश डाला।

    योगभूषण ने बताया कि आहार ही औषधि है। अगर भोजन को औषधि के तरह लिया जाए तो औषधि को भोजन की तरह लेने की जरूरत कभी नहीं पड़ेगी। भोजन की शुद्धि परमावश्यक है। जिस भावना से भोजन किया जाता है वह भावना हमारे सारे शरीर मे व्याप्त हो जाती है। उन्होंने जल मंत्र के बारे मे भी बताया कि जल हर ऊर्जा को ग्रहण करता है। उन्होंने मंत्र शक्ति जागरण के बारे मे भी बताया। मंत्र का उच्चारण शुद्ध और स्पष्ट होना चाहिए। ॐ का उच्चारण अधिकतर लोग गलत करते है। ॐ का उच्चारण अ से म की तरफ होना चाहिए। ॐ एक बीजमंत्र है महामंत्र है। ॐ का प्रातः बेला मे कम से कम 27 बार जाप करना चाहिए।

    मदन लाल जिंदल ने बताया कि सभी को नियमित रूप से संस्थान मे तन, मन और धन से सेवा करनी चाहिए इसमे उन्होंने खुद के बहुत से उदाहरण दिए।

    अध्यक्षा शशि गुप्ता ने अपने धन्यवाद प्रस्ताव में सभी अतिथियों और गोप्रेमियों के पधारने के लिए धन्यवाद दिया योगभूषण जी का उनके आशीर्वचन और मार्गदर्शन के लिए विशेष आभार व्यक्त किया । उन्होंने योगभूषण जी से संस्थान मे विशेष मंत्र शिविर लगाने का भी अनुरोध किया जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया।

    इसके उपरांत मुख्य अतिथि एवं अन्य अतिथियों ने कामधेनु मन्दिर एवं कामधेनु आरोग्य वैलनेस संस्थान का अवलोकन किया तथा गौवंश को सवामणि एवं चारा अर्पित करने के उपरान्त प्रसाद ग्रहण किया ।

    इस अवसर पर डी पी गोयल, संस्थापक – कैनवीन अस्पताल, गुरुग्राम, पवन जादू, उषा गर्ग, दिनेश गुप्ता, विशाल गर्ग, महावीर बोरा, आचार्य मनीष शर्मा गोप्रेमी, श्रीमती विष्णु भगवान, प्रमोद गर्ग-द्वारका, विनोद बिस्सर, पटेल बिस्सर, सुखबीर उर्फ तेजपाल, जगदीश गोस्वामी, अभिनव गोस्वामी, डॉ वाई के शर्मा, गगन प्रकाश, शमशेर आर्य- हिसार, जीतू यादव, अजित यादव, नवीन गुप्ता, मुकेश, बलजीत, सतबीर सिंह, देव प्रदीप, अश्विनी अगग्रवल, नवीन झा, बृंदावन, राम सिंह बिस्सर सहित क्षेत्रीय गांवों के गणमान्य लोग उपस्थित रहे ।

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