पंकज अरोड़ा की रिपोर्ट/फरीदाबाद: 27 मई, बत्रा हार्ट एंड मल्टीस्पेशलिटी हास्पिटल फरीदाबाद में गम्भीर हृदय रोग की एक 72 वर्षीय महिला मरीज के ह्रदय में पुराने संकुचित वाल्व के बदले सफलतापूर्वक टीएवीआर (ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व रिप्लेसमेंट) प्रतिस्थापित कर नई जिंदगी दी। लगातार 50 मिंट तक चली इस अत्यधिक जटिल प्रक्रिया में बत्रा हास्पिटल के कार्डिएक साइंस विभाग के चैयरमेन एवं जाने माने वरिष्ठ कार्डियोलोजिस्ट डा पंकज बत्रा ने अपनी विशेषज्ञता एवं अथक प्रयास से मरीज को नया जीवन प्रदान किया। फरीदाबाद के किसी भी हास्पिटल में यह अपनी तरह का अभूतपूर्व प्रतिस्थापन है जिसमें एक 72 वर्षीय मरीज को बिना बेहोश किये सफलतापूर्वक टीएवीआर प्रतिस्थापन प्रक्रिया पूरी की गई।

आज आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में डा पंकज बत्रा ने मीडिया को बताया कि यह मरीज बत्रा हार्ट हास्पिटल में तीन महीने पहले गम्भीर हार्ट फेल्योर अवस्था में आईं थीं जिनका हास्पिटल में आवश्यक उपचार किया गया। उस समय मरीज का हार्ट मात्र 20 प्रतिशत कार्य कर रहा था। मरीज का वाल्व सिकुड़ गया था जोकि पूर्ण रूप से कार्य नहीं कर रहा था। मरीज के परिजनों ने अन्य ने वाल्व बदलवाने के लिए अन्य हस्पतालों से ओपन हार्ट सर्जरी के लिए परामर्श किया जिसके लिए सभी सर्जनों ने यह कहते हुए हाथ खड़े कर दिए कि ऐसा करने से मरीज की जान को खतरा है। तब वो पुनः डा पंकज बत्रा के पास आये और तो डा बत्रा ने उन्हें टीएवीआर प्रक्रिया की सलाह दी। मरीज के परिजनों की अनुमति पर अत्यधिक जोखिम से भरी इस प्रक्रिया को डा बत्रा ने अपनी सूझबूझ व विशेषज्ञता से सफलतापूर्वक पूरा कर मरीज को नई जिंदगी दी जिसमें मरीज को पूर्णतया राहत मिली और अब मरीज का ह्रदय 55 प्रतिशत कार्य कर रहा है।
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टीएवीआर प्रक्रिया के बारे में डा पंकज बत्रा ने बताया कि टीएवीआर (ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व रिप्लेसमेंट) एक न्यूनतम इनवेसिव प्रक्रिया है जिसमें रोगग्रस्त एओर्टिक वाल्व को बायलोजिकल टिस्यू से बने वाल्व से बदल दिया जाता है। ओपन हार्ट सर्जरी के विपरीत डॉक्टर एक पतली कैथेटर को धमनी (आमतौर पर कमर में स्थित) के माध्यम से निर्देशित करते हैं ताकि हृदय को रोके बिना या छाती को खोले बिना नए वाल्व को प्रत्यारोपित किया जा सके। इस प्रक्रिया में एक कैथेटर के माध्यम से हृदय में एक सिकुड़ने योग्य वाल्व को पहुंचाया जाता है जो एक बार फैलने के बाद पुराने वाल्व को एक तरफ धकेल देता है और रक्त प्रवाह को नियंत्रित करने का कार्य अपने हाथ में ले लेता है। टीएवीआर प्रक्रिया को मूल रूप से अधिक उम्र के, उच्च जोखिम वाले रोगियों के लिए विकसित किया गया था जो पारंपरिक सर्जरी सहन नहीं कर सकते थे। लेकिन आज इसका उपयोग जोखिम के व्यापक स्तर वाले उन रोगियों के लिए किया जाता है जिनका वाल्व संकुचित होकर रक्त प्रवाह को प्रतिबंधित करता है।
हार्ट की इस समस्या को मेडिकल भाषा में Severe Aortic Stenosis यानि गंभीर महाधमनी स्टेनोसिस कहते हैं। यह एक महंगी व अत्यधिक जटिल व जोखिम भरी प्रक्रिया है जिसे सफलतापूर्वक डा पंकज बत्रा ने किया है। उपचार के उपरांत मरीज पूरी तरह से स्वस्थ्य महसूस कर रहा है। प्रेस वार्ता के दौरान मरीज व उनके परिजन उपस्थित रहे। उन्होंने अपने मरीज के सफलतापूर्वक उपचार और हास्पिटल में मिले सौहार्दपूर्ण व्यवहार व सुविधाओं के लिए सभी डॉक्टरों और स्टाफ का आभार व्यक्त किया।
