पंकज अरोड़ा की रिपोर्ट/फरीदाबाद: 7 जून, 2026: हाल ही में मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स फरीदाबाद में ब्रेन एवं स्पाइन सर्जरी टीम ने आधुनिक न्यूनतम चीड-फाड़ सर्जरी की मदद से एक 40 वर्षीय युवक के दिमाग से टेनिस बॉल के आकार के ट्यूमर (लगभग 6 सेमी साइज) को निकालने में बड़ी सफलता हासिल की है। मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स में ब्रेन एवं स्पाइन सर्जरी विभाग के प्रोग्राम क्लिनिकल डायरेक्टर एवं एचओडी डॉ. तरुण शर्मा ने बताया कि हमारे पास पलवल जिले की होडल तहसील के गाँव बनचारी से 40 वर्षीय ओमवीर आया। मरीज को पिछले महीने सिर में दर्द, उल्टी आने, भूलने और जुबान लड़खड़ाने की समस्या हुई थी। इसके मद्देनजर परिजन ने शहर के कई बड़े अन्य हॉस्पिटल्स में चिकित्सकों से सलाह ली और जाँच में ब्रेन ट्यूमर का पता चला। जब मरीज हमारे पास आया तो हमने मरीज के ब्रेन का एमआरआई स्कैन कराया जिसमें दिमाग के सेंट्रल हिस्से में बायीं तरफ टेनिस बॉल के आकार की एक गांठ दिखाई दी। यह गांठ ब्रेन ट्यूमर की थी। बिना समय गंवाए हमने मरीज के परिजन को सर्जरी कराने का सुझाव दिया। परिजन की अनुमति से हमने एडवांस्ड तकनीक माइक्रोस्कोप, न्यूरो नेविगेशन और न्यूरो मॉनिटरिंग की मदद से सर्जरी करके ट्यूमर को सुरक्षित रूप से बाहर निकाल दिया।
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आम लोगों को ब्रेन ट्यूमर को लेकर कुछ भ्रम हैं कि ब्रेन ट्यूमर होने पर सर्जरी कराने के बावजूद मरीज का बचना असंभव है। ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी के बाद मरीज अपंग भी हो सकता है या कोमा में जा सकता है इसलिए मरीज और परिजन काफी परेशान थे। काउंसलिंग करने के बाद मरीज एवं परिजन ने सर्जरी कराने के लिए अनुमति दी। डॉ. तरुण शर्मा ने कहा कि ब्रेन के सेंट्रल हिस्से के आसपास हमारे शरीर के बैलेंस करने वाली, बोलने व सुनने, साँस लेने एवं दिल की धड़कन की प्रक्रिया को नियंत्रित करने वाली नसें होती हैं। इसलिए हम एडवांस्ड तकनीक माइक्रोस्कोप की मदद से ब्रेन के सेंट्रल हिस्से में ट्यूमर तक एक सुरक्षित कॉरिडोर के जरिये पहुंचे ताकि शरीर के पावर, याददाश्त, देखने, सुनने, समझने का सेंटर में कोई क्षति न हो। फिर सर्जरी के द्वारा मरीज के दिमाग से सारे ट्यूमर को सुरक्षित तरीके से बाहर निकाल दिया। सर्जरी में लगभग 3 घंटे का समय लगा। सर्जरी के अगले दिन मरीज ने पहले की तरह बोलना शुरू कर दिया। मरीज की सर्जरी 19 मई 2026 को की गई। सर्जरी के 4 दिन बाद मरीज को हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गई। मरीज के ठीक होने पर परिजन ने मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स, डॉ. तरुण शर्मा और समस्त ब्रेन एवं स्पाइन सर्जरी टीम का धन्यवाद किया।

मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स में ब्रेन ट्यूमर की सफल सर्जरी के बाद मरीज ओमवीर ( 40 वर्षीय) और साथ में खड़े हैं ब्रेन एंड स्पाइन सर्जरी विभाग के प्रोग्राम क्लिनिकल डायरेक्टर डॉ तरुण शर्मा और उनकी समस्त टीम
डॉ. तरुण शर्मा ने बताया कि यह केस काफी चुनौतीपूर्ण था क्योंकि ट्यूमर ब्रेन के सेंट्रल हिस्से में उस जगह पर था जहाँ एक पानी की थैली होती है। ट्यूमर इस पानी के थैली में फैला हुआ था। सर्जरी करने के दौरान अगर इस हिस्से में ब्लीडिंग हो जाए तो दिमाग में सूजन आ सकती है। ब्रेन में इस पानी की थैली के अगल बगल में हमारे पॉवर के सेंटर होते हैं जैसे हाथ-पैर की ताकत के सेंटर होते हैं। अगर सर्जरी करने के दौरान एक छोटी सी गलती से मरीज के हाथ-पैर की ताकत परमानेंट रूप से जा सकती है। अगर आप ट्यूमर तक पहुँचने के लिए गलत कॉरिडोर चुनते हैं तो मरीज को बोलने या सुनने, या शरीर का बैलेंस आदि प्रभावित हो सकता है। सर्जरी के दौरान ब्लड लॉस होने की भी बहुत संभावना थी लेकिन हमने एडवांस्ड तकनीक माइक्रोस्कोप, न्यूरो नेविगेशन और न्यूरो मॉनिटरिंग की मदद से सटीक जगह पर पहुंचकर ट्यूमर को सुरक्षित रूप से बाहर निकाल दिया। सर्जरी सफल रही और मरीज पूरी तरह से स्वस्थ है। सर्जरी के दौरान ब्रेन एवं स्पाइन सर्जरी टीम से डॉ. सचिन गोयल-सीनियर कंसल्टेंट एवं एचओडी और डॉ. मनीष मिश्रा का भी विशेष योगदान रहा।
ब्रेन ट्यूमर किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है। सबसे जरूरी है कि सिर दर्द होना, सुबह के समय उल्टियां आना, मिर्गी के दौरे आना, जुबान लडखडाना, हाथ-पैरों में कमजोरी आना, याददाश्त में कमी होना जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें क्योंकि सही समय पर सही इलाज मिलने पर बीमारी को प्रभावी तरीके से ठीक किया जा सकता है।
माइक्रोस्कोप से न्यूरो सर्जन को ट्यूमर और स्वस्थ मस्तिष्क के ऊतकों के बीच स्पष्ट अंतर दिखता है, जिससे स्वस्थ हिस्सों को कोई नुकसान नहीं पहुँचता है। न्यूरो नेविगेशन सर्जरी के दौरान ट्यूमर की बिल्कुल सटीक जगह (3D इमेजिंग) बताती है, जिससे सर्जन कम से कम चीरे के साथ ट्यूमर तक पहुँच सकते हैं। न्यूरो मॉनिटरिंग से सर्जरी के समय दिमाग और नसों की लगातार निगरानी होती है, जिससे बोलने, देखने या चलने-फिरने की क्षमता (मोटर स्किल्स) को सुरक्षित रखने में मदद मिलती है।
डॉ. नवनीत सिंह छाबड़ा, फैसिलिटी डायरेक्टर, मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स, फरीदाबाद ने कहा, “यह केस न्यूरो सर्जरी में हुई एडवांसमेंट्स और ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित मरीजों को मिलने वाली उम्मीद को दिखाता है। यह अचीवमेंट वर्ल्ड-क्लास हेल्थ केयर सेवाओं और क्लिनिकल एक्सपर्टीज़ के ज़रिए लोगों की जिंदगी में बदलाव लाने एवं उन्हें क्वालिटी ऑफ़ लाइफ़ देने पर हमारे लगातार फोकस को दिखाती है।”
