नई दिल्ली /फरीदाबाद: आज विश्व तंबाकू निषेध दिवस है। शराब, सिगरेट, और कोई ड्रग्स का नशा कर रहा है! ये नशा क्या है? स्प्रिचुअल हाइट में जो नशा है, वो नशा और ये नशा क्या है? अगर कोई नशा कर रहा है, चाहे वो ड्रिंक्स ले रहा है, स्मोक करता है या कोई ड्रग्स लेता है या वीड लेता है, क्यों ले रहा है? ये नशा क्या करता है? बाहर का नशा तुम्हारा बहुत हल्का नशा है, जैसे बीयर का नशा, और अंदर की स्प्रिचुअलिटी वो परिपूर्णता है जो कम्पलीट नशा है, खुमारी है। गुरु नानक साहिब ने जो बताया,वो नशा कभी खत्म ही नहीं होता। जैसे कि एक आदमी पूरी बोतल पी ले, तो कितना नशा हो जाएगा। परिपूर्ण स्प्रिरिचुअलिटी ऐसी स्थिति है, जैसे कि बोतल के पीछे पाइप लाइन लगी हुई है, शराब के समुंदर में पाइप डला हुआ है I उस स्थिति में वो नशा टूटता ही नहीं, सौ पर्सेंट नशा है खुमारी I

अब ये बाहर का नशा जो आज संसार करता है, ये सिर्फ एडिक्शन है, भूलने के लिए अपने आप को। आज कोई भी नशा अपने को थोड़ा टाइम भुलाने के लिए किया जाता है I कभी कोई शौक में नशा शुरू कर देता है I सिगरेट, शराब पीना कॉमन हो गया है, हाई सोसाइटी का फैशन हो गया है I फिर ये आउट ऑफ कंट्रोल हो जाता है, और बाद में क्लेश, टेंशन, किट-किट के कारण पीना शुरू कर देता है I
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पीने से शरीर तो गल ही रहा है, एक दिन लंग्स अंदर सडेंगे, ऑक्सीजन नहीं जाएगी, तो ऑटोमैटिकली साँस उखड़ेगी और जब साँस उखड़ेगी, तो जिंदगी क्या रह जाएगी? अधमरा सा थोड़े ही रहना है, कि पंप ले लेकर घूमेगा, फिर वेंटिलेटर पर लेटोगे क्या? तो एक ना एक दिन, अगर तुम शराब या सिगरेट पीते हो, तुम्हारे लिवर और लंग्स पर अंदर असर आने ही वाला है। सिगरेट पीने से धुआँ अंदर जा रहा है। तुम्हारे लंग्स के ऊपर पूरा का पूरा चढ़ता जा रहा है। पर तुम शौक में, दूसरों को दिखाने के लिए क्या कर रहे हो ? अब तुम्हारे को ये फैशन लगता है कि हाथ में सिगरेट है तो बहुत बड़े आदमी हो। अरे, “ओ माय गॉड, यह देख सिगरेट पी रही है!” और इससे क्या हो रहा है? एक दिन तुम्हारे को ही बिस्तर पर गिरना पड़ेगा। साँस की नली के अंदर ब्लोकेज आ जायेगी क्योंकि जो तुम पी रहे हो वो सारा का सारा धुआँ बाहर थोड़े ही जा रहा है, अंदर भी जा रहा है। तो तुम्हारे अंदर ये सड़ेगा और जब तुम हॉस्पिटलाईज होते हो, तब मालूम पड़ता है कि मैंने क्या भूल कर दी!
अब जब तुम स्प्रिचुअलिटी में आते हो, यानी धर्म की तरफ चलते हो, तो ऑटोमैटिकली तम्हारा नशा बढ़ने लगता है। जब तम स्प्रिचुअलिटी की कंपलिशन की स्टेट पर आओगे, तुम देखोगे कि बाहर का नशा अपने आप कम होने लगेगा। स्प्रिचुअलिटी की राह पर अपने आप तुम्हारी शराब, सिगरेट, तुम्हारी दुनियादारी, तुम्हारी माया का सारा नशा, हर चीज तुम्हारी गिरने लगेगी, क्योंकि तुम्हारे को बड़ा नशा मिल जाएगा। खुमारी, महा नशा! वो महा नशा जब तक तुम्हारे जीवन में नहीं आएगा, ये नशे तुम्हारे कैसे छूटेंगे? बाबर से जब शराब की ऑफर गुरु नानक देव को आई, तो उनहोंने कहा,” भाई मैं ते पित्ती हुई है, आज से पंद्रह साल पहले पित्ती सी, अब तक चढ़ी हुई है।“ गुरुनानक साहिब ने फिर कहा “नाम खुमारी नानका चढ़ी रहे दिन रात।“ जिस दिन मिटने की तड़प आ गई, उस दिन तुम देखना, तुम्हारे जीवन के अंदर वो रोशनी आ जाएगी जिससे तुम परमात्मा को, उस मुक्ति को पाओगेI जिस दिन वो आ गया, क्या शराब ,क्या सिगरेट, क्या मुर्गा क्या संसार की वासनाएँ, कामनाएँ, सब जीरो हो जाएँगी I अंदर चौबीस घंटे अजप्पा, स्वाँसा दी माला में वो एक ही चलेगा, उसी को कहा खुमारी और उसी में तेरी जीवन की यात्रा उस परम धाम को पाएगी और जन्म सफल होगा I
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