अमृता अस्पताल में नेत्रदान पखवाड़े का समापन; 10–15 नेत्रदाता परिवारों का सम्मान, कॉर्निया प्राप्तकर्ता ने अपनी लिखी पुस्तक की भेंट
पंकज अरोड़ा की रिपोर्ट/फरीदाबाद: 7 सितंबर 2026, नेत्रदान किसी अनजान व्यक्ति को केवल आंखों की रोशनी नहीं देता, बल्कि उसके अधूरे सपनों को फिर से पूरा करने का अवसर भी दे सकता है। इसकी एक भावुक मिसाल अमृता अस्पताल, फरीदाबाद में देखने को मिली, जहां कॉर्निया ट्रांसप्लांट के बाद दोबारा देखने में सक्षम हुईं रतन रश्मि रैना ने अपनी लिखी पुस्तक उड़ता मन पंछी’ प्रस्तुत की।

डॉ. मीनाक्षी वाई. धर, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, नेत्र रोग विभाग; रतन रश्मि रैना, कॉर्निया ट्रांसप्लांट प्राप्तकर्ता एवं ‘उड़ता मन पंछी’ की लेखिका; डॉ. रश्मि मित्तल, सीनियर कंसल्टेंट एवं हेड, कॉर्निया सर्विसेज; और डॉ. संजीव सिंह, मेडिकल डायरेक्टर, अमृता अस्पताल, फरीदाबाद
यह अवसर नेत्रदान पखवाड़े के समापन पर आयोजित विशेष कार्यक्रम का था, जिसमें करीब 0–15 नेत्रदाता परिवारों को सम्मानित किया गया। इन परिवारों के नेत्रदान के फैसले ने कॉर्नियल ब्लाइंडनेस से जूझ रहे लोगों के जीवन में नई रोशनी लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
![]()
कार्यक्रम का सबसे खास क्षण रतन रश्मि रैना की कहानी रही। आंखों की समस्या के कारण प्रभावित हुई उनकी दृष्टि अमृता अस्पताल में उपचार और कॉर्निया ट्रांसप्लांट के बाद बहाल हुई। इसके बाद उन्होंने अपने जीवन के अनुभवों, स्मृतियों, रिश्तों और जीवन यात्रा में मिले सुख-दुख को शब्दों में पिरोकर ‘उड़ता मन पंछी’ की रचना की।
अपनी पुस्तक के आभार ज्ञापन में रतन रश्मि रैना ने डॉ. मीनाक्षी वाई. धर, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, नेत्र रोग विभाग और डॉ. रश्मि मित्तल, सीनियर कंसल्टेंट, नेत्र रोग विभाग एवं हेड, कॉर्निया सर्विसेज, अमृता अस्पताल, फरीदाबाद के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया है। उन्होंने लिखा है कि आंखों की रोशनी वापस मिलने के बाद ही उनके मन में संजोए अनुभव शब्दों का रूप ले सके और पुस्तक लिखने का उनका सपना साकार हुआ।
डॉ. मीनाक्षी वाई. धर ने कहा “कॉर्निया ट्रांसप्लांट का अर्थ केवल किसी व्यक्ति की दृष्टि में सुधार होना नहीं है। जब कोई मरीज दोबारा पढ़ता है, लिखता है, स्वतंत्र रूप से अपना जीवन जीता है या अपने किसी अधूरे सपने को पूरा करता है, तब नेत्रदान का वास्तविक महत्व सामने आता है। रतन रश्मि रैना का दृष्टि वापस पाने के बाद पुस्तक लिखना इसका बेहद खूबसूरत उदाहरण है। लेकिन उनकी इस उपलब्धि के पीछे उस नेत्रदाता परिवार का निर्णय भी है, जिसने कठिन समय में किसी अनजान व्यक्ति को दुनिया फिर से देखने का अवसर दिया।”
डॉ. रश्मि मित्तल ने कहा “कॉर्नियल ब्लाइंडनेस के कई मरीजों में कॉर्निया ट्रांसप्लांट दृष्टि बहाल करने का प्रभावी माध्यम हो सकता है, लेकिन इसके लिए दान में मिले स्वस्थ कॉर्नियल टिश्यू की आवश्यकता होती है। इसलिए सबसे बड़ी जरूरत लोगों में नेत्रदान को लेकर जागरूकता बढ़ाने की है। एक परिवार का लिया गया निर्णय किसी दूसरे व्यक्ति के जीवन की दिशा बदल सकता है। रतन रश्मि रैना की यात्रा—दृष्टि खोने से लेकर दोबारा देखने और फिर लेखिका बनने तक—नेत्रदान की ताकत को आंकड़ों से कहीं अधिक प्रभावशाली ढंग से सामने रखती है।”
कार्यक्रम में पोस्टर प्रतियोगिता और जन-जागरूकता सत्र भी आयोजित किए गए। नेत्रदान को लेकर समाज में जागरूकता फैलाने में सहयोग करने वाले गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों को भी सम्मानित किया गया।
25 अगस्त से 7 सितंबर तक देशभर में मनाए जाने वाले नेत्रदान पखवाड़े का उद्देश्य कॉर्नियल ब्लाइंडनेस, कॉर्निया प्रत्यारोपण और नेत्रदान के महत्व को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाना है।
डॉ. मीनाक्षी वाई. धर, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, नेत्र रोग विभाग; रतन रश्मि रैना, कॉर्निया ट्रांसप्लांट प्राप्तकर्ता एवं ‘उड़ता मन पंछी’ की लेखिका; डॉ. रश्मि मित्तल, सीनियर कंसल्टेंट एवं हेड, कॉर्निया सर्विसेज; और डॉ. संजीव सिंह, मेडिकल डायरेक्टर, अमृता अस्पताल, फरीदाबा
