सिक्योरिटी राशि 4 किस्तों में लिए जाने के फैसले का स्वागत, मगर उपभोक्ताओं को मिले पूर्ण राहत : अशोक अरोड़ा


फरीदाबाद, 13 अप्रैल : नगर निगम के पूर्व महापौर अशोक अरोड़ा ने मुख्यंत्री द्वारा अग्रिम खपत राशि 4 किश्तों में लिए जाने के फैसले का स्वागत किया, मगर साथ ही कहा कि अगर मुख्यमंत्री सिक्योरिटी वसूले जाने के इस फैसले को वापिस ले लेते तो उनको दोगुणी खुशी होती। अरोड़ा ने मुख्यमंत्री से मांग की, कि बिजली निगम केवल डिफाल्टर कस्टमरों से ही अग्रिम खपत राशि वसूले। सिक्योरिटी को लेकर मुख्यमंत्री ने प्रैसवार्ता में स्पष्ट किया था कि बिजली निगम ने उन लोगों पर जोकि बिजली का बिल भरते नहीं थे, मीटर कट जाते थे और फिर नए नाम से मीटर कनैक्शन ले लेते थे। इसको देखते हुए बिजली निगम ने उपभोक्ताओं से अग्रिम खपत राशि सिक्योरिटी के रूप में जमा करने का फैसला लिया है। इसका उपभोक्ताओं को इंटरेस्ट भी नहीं मिलता है। मगर, मैं मुख्यमंत्री से पूछना चाहता हूं कि क्या 1-2 प्रतिशत ऐसे डिफाल्टरों की वजह से सभी उपभोक्ताओं से अग्रिम खपत राशि वसूला जाना न्यायोचित है। जो उपभोक्ता हर माह बिजली बिल भर रहा है और नया कनैक्शन लेते समय वो सिक्योरिटी भी जमा कराते हैं, फिर ऐसे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डालने का क्या तात्पर्य है। अरोड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने सिक्योरिटी राशि 4 किश्तो में ले जाने की बात की है, मगर कोरोना काल में जब उपभोक्ताओं की जेब पहले ही खाली है। स्कूल सैशन शुरू हो चुके हैं, बच्चों के दाखिले कराने के लिए लोगों को मशक्कत करनी पड़ रही है, तो ऐसे में लोगों की जेबों पर अतिरिक्त बोझ डालना कहां तक न्यायोचित है? क्या सरकार मात्र कुछ डिफाल्टरों की वजह से सभी उपभोक्ताओं को प्रताडि़त करेगी। पूर्व महापौर ने कहा कि फरीदाबाद शहर के लोग हरियाणा को सबसे ज्यादा रेवेन्यू देते हैं, मगर सुविधाओं के नाम पर यहां कुछ नहीं है। बिजली बिल सिक्योरिटी जमा कराने से पहले लोगों को सुविधाएं मुहैया कराए बिजली निगम। यहां पर न तो कोई हैल्पलाइन नंबर है, न कोई शिकायत पर सुनवाई होती है। पूरे शहर में बिजली की तारों का जाल बिछा हुआ है, मनमाने तरीके से लाइन खींची हुई है। लोगों की प्रॉपर रीडिंग नहीं होती, साल-साल में बिल इकट्ठा आता है, कई लोगों के बिल गलत भेज दिए जाते हैं, जिनको ठीक करवाने में उपभोक्ताओं के पसीने छूट जाते हैं। इन सब हालातों के बीच बिजली निगम द्वारा लोगों से सिक्योरिटी के नाम पर वसूली करना बिल्कुल भी सहीं नहीं है।

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