ईएसएससीआई व आईजी ड्रोन मिलकर करेंगे युवाओं को ड्रोन के क्षेत्र में प्रशिक्षित

दिल्ली

प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए दोनों संस्थाओं ने किया एमओयू
 
नई दिल्ली: 26 अगस्त, केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय के अधीन कार्यरत इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर स्किल काउंसिल ऑफ इंडिया (ईएसएससीआई) अब युवाओं को ड्रोन तकनीक में स्किल ट्रेनिंग देगी। इसके लिए ईएसएससीआई ने देश की एक प्रमुख उद्यम ड्रोन कंपनी आईजी ड्रोन के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। ईएसएससीआई के मुताबिक, देश में ड्रोन तकनीक के विकास होने के साथ ही अब यह अरबों डॉलर की इंडस्‍ट्री हो गई है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने जुलाई 2021 में ड्रोन रूल्‍स 2021 जारी किया है।*देश में ड्रोन के लिए नई नीति आने से वाणिज्यिक संस्थाओं, व्यक्तियों, सशस्त्र बलों और सरकारी संगठनों सहित कई उद्योगों में और तेजी आने की उम्मीद है। भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए, ईएससीआई की ओर से कार्यवाहक प्रमुख पीयूष चक्रवर्ती और आईजी ड्रोन के सह-संस्थापक और निदेशक ओम प्रकाश दास ने ईएससीआई मुख्यालय, नई दिल्ली में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
 
एमओयू का उद्देश्य विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों और विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर नेशनल स्किल क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क के तहत बीवॉक एवं बीएससी पाठ्यक्रम शुरू करना है और साथ ही उत्कृष्टता केंद्र और मॉडल प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करना है। इसके अलावा, अप्रेंटिसशिप स्‍कीम के तहत ड्रोन इंडस्ट्री में उन्‍हें बतौर ट्रेन ग्राउंड प्रशिक्षण दिलाया है।
 
ईएसएससीआई के कार्यवाहक प्रमुख पीयूष चक्रवर्ती ने कहा कि ड्रोन रूल्स 2021 और यूएवी ट्रैफिक मैनेजमेंट नीति के कारण के कारण भारत जल्द ही ड्रोन निर्माण एवं उपयोग के क्षेत्र में अग्रणी देशों की सूची में शामिल हो जाएगा। ऐसे में नौकरी एवं स्‍वरोजगार दोनों के लिए युवाओं को प्रशिक्षित करने की जरूरत है। ईएसएससीआई और आईजी ड्रोन अब दोनों मिलकर देश में ड्रोन इकोसिस्टम को विकसित करने का प्रयास करेंगे।
 
वहीं, आईजी ड्रोन के सह-संस्थापक और निदेशक ओम प्रकाश दास ने कहा कि ड्रोन इंडस्‍ट्री देश में तेजी से विकसित हो रही है। इससे तकनीकी दक्षता के साथ प्रशिक्षित ड्रोन पायलट एवं मेंटेनेंस के लिए आवश्‍यक कुशल कार्यबल की आवश्यकता होगी। स्किल इंडिया मिशन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के अनुरूप, आईजी ड्रोन इस क्षेत्र में सुरक्षा, नवाचार, तकनीकी क्षमता और फ्लाइंग रेगुलेशन को प्रभावी रूप से लागू करके योगदान दे रही है। उन्होंने कहा कि समझौता ज्ञापन के जरिये दोनों संस्थान तकनीकी नवाचार और प्रशिक्षण के लिए काम करेंगे। जिससे देश में गुणवत्तापूर्ण ड्रोन प्रशिक्षु की संख्या बढ़े। इंडस्‍ट्री को एक कुशल व्यक्ति मिले और युवाओं को इस क्षेत्र में रोजगार।  

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