IOCL, BPCL, KPMG, BDO सहित कई प्रमुख संस्थानों के अधिकारी हुए शामिल, CSR और ESG में प्रभाव मापन पर मिला प्रशिक्षण
पंकज अरोड़ा की रिपोर्ट/फरीदाबाद/नई दिल्ली-एनसीआर, 17 जुलाई 2026: देश में कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) अब सिर्फ पैसे खर्च करने तक सीमित नहीं रह गई है। अब यह जानना भी उतना ही जरूरी हो गया है कि इन परियोजनाओं से समाज में कितना वास्तविक बदलाव आया। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए अमृता विश्व विद्यापीठम ने सोशल इम्पैक्ट मेजरमेंट एंड मैनेजमेंट (SIMM) पर दो दिवसीय एग्जीक्यूटिव सर्टिफिकेट कार्यक्रम आयोजित किया।
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इस कार्यक्रम का आयोजन अमृता स्कूल फॉर सस्टेनेबल फ्यूचर्स और यूनेस्को चेयर ऑन एक्सपीरिएंशियल लर्निंग फॉर सस्टेनेबल इनोवेशन एंड डेवलपमेंट के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इसमें इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL), KPMG इंडिया, BDO इंडिया, Aspire Impact Assurance, PEHL समेत CSR, ESG, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास से जुड़े कई संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

नेशनल CSR पोर्टल के अनुसार, वर्ष 2014 से अब तक भारतीय कंपनियां CSR गतिविधियों पर ₹2 लाख करोड़ से अधिक खर्च कर चुकी हैं। वहीं हर साल कंपनियां करीब ₹30,000 करोड़ CSR पर निवेश कर रही हैं। ऐसे में अब संस्थानों के लिए यह दिखाना भी जरूरी हो गया है कि उनके सामाजिक निवेश से जमीन पर कितना बदलाव आया।
कार्यक्रम में प्रतिभागियों को सामाजिक प्रभाव मापने के आधुनिक तरीकों, अंतरराष्ट्रीय मानकों, इम्पैक्ट असेसमेंट, सोशल रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (SROI) और प्रभावी रिपोर्टिंग पर प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (CD&CSR) बिभूति रंजन प्रधान ने भी CSR में प्रभाव आधारित सोच को मजबूत करने पर अपने विचार साझा किए।
प्रो. संतोष जयराम, एडजंक्ट प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस, अमृता स्कूल फॉर सस्टेनेबल फ्यूचर्स एवं KPMG इंडिया के पूर्व पार्टनर ने कहा, आज केवल यह बताना काफी नहीं है कि पैसा कहां खर्च हुआ। यह साबित करना भी जरूरी है कि उससे लोगों के जीवन में क्या बदलाव आया। ऐसे समय में संस्थानों को प्रभाव मापने की सही समझ और वैज्ञानिक तरीके की जरूरत है। अमृता इसी दिशा में क्षमता निर्माण का काम कर रहा है।
प्रो. संतोष जयराम, डॉ. कार्तिक शंकरणारायणन और डॉ. कृष्ण नंदनन के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य संस्थानों को सामाजिक निवेश को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और परिणाम आधारित बनाने के लिए तैयार करना था।
