कुपोषण एक ऐसी समस्या है जो हर वर्ग को घेरे हुए है:- पोषण एवं प्राकृतिक स्वास्थ्य विज्ञान संघ

Nutrition and Natural Health Science Association
नई दिल्ली: 11 जुलाई,
पोषण एवं प्राकृतिक स्वास्थ्य विज्ञान संघ ग्रामीण स्वास्थ्य बेहतरी की ओर कदम उठा रही है, कुपोषण भारत में एक ऐसी समस्या है जो हर वर्ग को घेरे हुए है, चाहे अमीर हो या गरीब, हर कोई कही न कही किसी न किसी रूप में कुपोषण का शिकार है.
क्या कुपोषण एक ऐसी समस्या है जिस से निजात नही मिल सकती ?? या हमें इस बारे में पूरी जानकारी ही नहीं है कि वास्तव में कुपोषण क्या है?? इसीलिए हम इस गंभीर समस्या से पूरी तरह लड़ नहीं पा रहे … कुपोषण को एक ऐसी स्थिति कहा जा सकता है जिसमे किसी भी पोषक तत्व कि कमी या अधिकता शरीर में हो जाती है. मोटे तौर पर कुपोषण को प्रोटीन और ऊर्जा कि कमी से होने वाला रोग माना जाता है किन्तु ऐसा नहीं है.
भारत में न जाने कितने लोग मोटापे के शिकार हैं,और न जाने कितने लोग डील -डॉल में बहुत अच्छे होते हुए भी कई बीमारियों से ग्रसित हैं, ऐसा इसलिए कि चाहे दिखने में कोई व्यक्ति कितना भी अच्छा हो शारीरिक रूप से उसमे कोई न कोई पोषक तत्व कम है. ऐसे बहुत से लोगो को हम अपने दैनिक जीवन में देखते हैं जो बहुत ही हृष्ट पुस्त नज़र आते हैं लेकिन जब हम उनसे बात करने लगते हैं तो एक एक करके सच्चाई सामने आती है मसलन : बाल बहुत झड़ रहे हैं , घुटनो में दर्द बहुत रहता है , थोड़ी देर काम करने के बाद कमज़ोरी सी आने लगती है, चलने फिरने में तकलीफ होती है, आँखों से धीरे धीरे दिखना कम होता जा रहा है,त्वचा बहुत ही रूखी रहती है और अपनी चमक भी खोने लगी है …..
सबसे एहम बात ये है कि ये सभी समस्याएं बड़े बुज़ुर्गो में नहीं बल्कि आजकल के युवा वर्ग में सबसे अधिक हैं.और अधिक बात करें तो ऐसी समस्याओं कि नींव बचपन से ही पड़ने लगी है. लेकिन केवल बात करने से ही क्या समस्या सुलझ जायेगी ? ऐसा होता तो अभी तक तो कुपोषण जैसी समस्या कब की समाप्त हो गयी होती .लेकिन ये समस्या ऐसी है जो खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है. चाहे आमिर ख़ान कुपोषण भारत छोड़ो जैसी मुहीम से जुड़ गए हो ,चाहे सरकार देश को स्वच्छ रखने के लिए देश भर में कार्यक्रम चला रही हो…. लेकिन
कुपोषण की जड़ें हैं पोषक तत्वों की भोजन में दिनों दिन घटती मात्रा में. केवल प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट्स ही नहीं बल्कि अन्य पोषक तत्व जैसे विटामिन ,खनिज लवणों की भारी कमी की वजह से कुपोषण की जड़ें गहरी होती जा रही हैं क्यूकि इन विटामिन और खनिज लवणों के शरीर पर प्रभाव के बारे में आम जनता को ज़्यादा ज्ञान नहीं है . इस से भी बड़ी विडम्बना ये है कि इन सब की कमी अथवा अधिकता के बारे में जब तक पता चलता है तब तक स्थिति हाथ से निकल जाती है क्यूकि ये लक्षण व्यक्ति अनदेखा कर देता है .
विभिन्न विटामिन कि कमी से ……vitamin A – रतौंधी, हाइपरकेराटोसिस, vitamin B1 – बेरीबेरी, vitamin B2 – अरिबोफ्लैविनोसिस ,vitamin B3 – पेलिग्रा ,vitamin B5 – पेस्थेरसिया, vitamin B6 – एनीमिया, vitamin B7 – डर्मेटाइटिस, vitamin B9 – बर्थ डिफेक्टस,vitamin B12 – मेगालोब्ला्स्टिक एनीमिया,vitamin C – स्कर्वी, vitamin D – रिकेट्स ,vitamin E – हीमोलाइटिक एनीमिया,vitamin K – ब्लीडिंग डाइथेसिस जैसे रोग
वहीँ खनिज लवणों जैसे कैल्शियम, मैग्नीशियम, सोडियम, लोहा, आयोडीन, जिंक की कमी अथवा अधिकता से ऐसे रोग या लक्षण उत्पन्न हो जाते हैं जिनके सही समय पर पता न लगने पर भयावह / जानलेवा परिणाम सामने आते हैं।
कैल्शियम की कमी से बच्चों की हडिडयों और दांतो में कैल्सिफिकेशन की क्रिया कम हो जाती है। कैल्शियम की कमी होने से हडिडयाँ मुड़ने लगती हैं, और टखने और कलाई बढ़ जाती हैं।
मैग्नीशियम की कमी होने से तंत्रिका पेशी उत्तेजनशीलता, टैटनी, और ऐंठन होती है। इसकी अधिक कमी होने से अत्यधिक प्यास, शरीर में बहुत अधिक गर्मी लगती है तथा तंत्रिका पेशिया में संचालन कम हो जाता है।
गर्मी के मौसम में सोडियम का अधिक निष्कासन होता है, जिसके परिणामस्वरूप कमजोरी, थकान, उल्टी और भूख कम हो जाती है।
लौह तत्व की कमी के कारण मनुष्य रक्तता (अनीमिया) नामक रोग से ग्रस्त हो जाता है। वह पीला और कमजोर दिखाई पड़ने लगता है। शरीर में हीमोग्लोबीन की मात्रा कम हो जाने के परिणामस्वरूप आक्सीजन थोड़ी मात्रा में मिलने के कारण, वह हमेशा थका हुआ और क्लान्त दिखाई पड़ता है। लौह तत्व की अधिक कमी होने पर नाखून टूटने लगते हैं व चम्मच के आकार के हो जाते हैं। अधिक कमी बढ़ती जाए, तब व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है।
आयोडीन की कमी होने से विश्व के अनेक भागों में गलगंड नामक बीमारी, महामारी की तरह फैलती देखी गई है।गलगंड बीमारी में थायोराइड नामक ग्रंथी सूज जाती है।
जस्ते की कमी होने से हमारा विकास रूक जाता है, किशोरावस्था में यौन सम्बन्धी शिशुता हो जाती है, स्वाद समाप्त हो जाता है व घाव को भरने में देर लगती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार देश में दस्त उल्टी के कारण शरीर में पानी एवं खनिज लवणों की कमी के कारण कई लाख बच्चे असमय ही मौत का शिकार हो जाते हैं। दस्त यानी पेचिस सामान्यत: गंभीर रोग नहीं होता। लेकिन इसका उपचार लापरवाही के कारण न करने से रोग गंभीर रूप इख्तियार कर सकता है। विशेषकर बच्चों में दस्त-पेचिस, उल्टियां (गैस्ट्रो इंट्राइरिस) बहुत ही आसानी से शरीर में पानी, खनिज लवणों की कमी मौत का कारण हो सकता है।
अतः विटामिन और खनिज लवणों की कमी एवं अधिकता के प्रभावों को देखते हुए हमें अधिक से अधिक इन दोनों की भोजन में पूर्ति के प्रयास तथा जन सामान्य को इनके बारे में शिक्षित और जागरूक करना होगा तभी हमारी सरकारी एवं गैर सरकारी योजनाएं सफल हो सकेंगी, इसी दिशा में पोषण एवं प्राकृतिक स्वास्थ्य विज्ञान संघ विभिन्न कार्यक्रम और सर्वेक्षण आयोजित करने की योजना बना रहा है जिस से एक नए और स्वस्थ भारत की सुदृढ नींव रखी जा सके ।

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